जागरण संवाददाता, कानपुर देहात: प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए
भले ही प्रदेश सरकार नए नियम और कानून ला रही हो लेकिन सतही स्तर पर कुछ
नहीं हो पा रहा। जिले के 50 परिषदीय स्कूलों में पांच-पांच अंग्रेजी विषय
के शिक्षकों का चयन कर विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई का संचालन
किया जाना था। सत्र शुरू होने के बाद भी अब तक शिक्षकों की तलाश पूरी नहीं
हो सकी है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के सभी दस ब्लाकों से पांच-पांच विद्यालयों
का चयन कर कुल 50 विद्यालय ऐसे चयनित किए थे। जहां पर अंग्रेजी माध्यम की
शिक्षा देकर विद्यालयों को माडल स्कूल का दर्जा दिया जा सके। इन विद्यालयों
में कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर पढ़ाई हो और बच्चों के साथ अभिभावक भी
पढ़ाई में रुचि ले। इस आशय को लेकर शुरुआती दौर में ही बीएसए पवन कुमार ने
विभाग के काबिल शिक्षकों की तलाश शुरू की। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में
पढ़ाने के लिए अंग्रेजी विषय से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षकों को पात्र
माना गया। विभाग ने बकायदा इसके लिए आवेदन मांगे, और परीक्षा करा कर चयन की
बात कही। 250 शिक्षकों की जरूरत पर जिले में तैनात साढ़े पांच हजार
शिक्षकों के सापेक्ष कुल 94 शिक्षकों ने आवेदन कर परीक्षा दी। जिनका परिणाम
भी अधर में है। शिक्षा सत्र शुरु हो जाने के बाद भी विभाग अंग्रेजी माध्यम
के शिक्षकों की तलाश में माथा पच्ची कर रहा है। वहीं शिक्षक भी अंग्रेजी
माध्यम की पढ़ाई करने से कतराते नजर आ रहे हैं। यहीं कारण है कि विभाग के
कई बार प्रयास करने के बाद भी शिक्षक आवेदन करने व परीक्षा देने को तैयार
नहीं है। शायद उन्हें इस बात का डर है कि कहीं परीक्षा व साक्षात्कार के
दौरान उनकी कलई न खुल जाए। जबकि इंटरमीडिएट अंग्रेजी की योग्यता रखने वाले
शिक्षकों की जिले में कमी नहीं है। फिर भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन
नहीं हो पा रहा है। बीएसए पवन कुमार ने बताया कि आवेदन मांगे गए थे।
जिन्होंने आवेदन किया था, उनका परिणाम आना अभी शेष है। जल्द ही शिक्षकों का
चयन कर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाई संचालित कराई जाएगी।
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