गोरखपुर : दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय) के शिक्षक भर्ती प्रक्रिया रोकने की माग लेकर अनुसूचित और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 20 अप्रैल के पत्र के मद्देनजर विश्वविद्यालय में विभाग को इकाई मानकर की जा रही शिक्षकों की चयन प्रक्रिया रोकने की माग की है।
इनका कहना है कि विश्वविद्यालय में जारी शिक्षकों की चयन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश सरकार के 19 फरवरी 2016 के अन्यायपूर्ण दिशा निर्देश के आधार पर चल रही है जिससे ओबीसी-एससी के लिए आरक्षित पदों की संख्या नगण्य है तथा एसटी दिव्याग अभ्यर्थियों को आरक्षण मिल पाना असंभव है। यूपी सरकार के इस निर्देश में आरक्षण का आधार विभाग को माने जाने की बात कही गई है।
परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यूजीसी के 20 अप्रैल के पत्र से स्पष्ट है कि यह मामला केन्द्र सरकार और यूजीसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ले जाया गया है तब ऐसी दशा में उत्तर प्रदेश सरकार के 19 फरवरी 2016 के आदेश के आधार पर हो रही वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगानी चाहिए और इस संबंध में अंतिम निर्णय आने तक समस्त चयन समितियों के सील बंद लिफाफे को खोले जाना स्थगति किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी के पत्र के बाद विभाग को ईकाई मानकर की जा रही नियुक्तिया असंगत, अन्याय पूर्ण तथा संविधान की सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि बहुसंख्यक दलित-पिछड़ा समाज के हितों की अनदेखी की गई तथा उनके संविधान प्रदत्त अधिकारों काक हनन किया गया तो हम लोकतात्रिक तरीकों से और तेज़ धरना-प्रदर्शन, अनशन करने पर बाध्य होंगे।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस चयन प्रक्रिया को आरक्षण का आधार विभाग को इकाई मानकर कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 29 अप्रैल को कार्यपरिषद की बैठक में चयनित शिक्षकों के लिफाफे को खोलने की घोषणा की है।
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