देश में हर दिन बच्चियों के साथ हो रहीं रेप की घिनौनी वारदातों की आवाज पूरी दुनिया में गूंज रही है। देश हो या विदेश इन घिनौने अपराध को लेकर भारत के पीएम मोदी की चुप्पी लोगों का धैर्य तोड़ रही है। गुस्साए लोग अब मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाने लगे हैं।
लोगों ने तो मोदी पर आरोपियों को बचाने तक का आरोप लगा दिया है।
इसी कड़ी में अब देश -विदेश के 600 गुस्साए शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को ओपन लेटर लिखा है। जिसमें उन्नाव और कठुआ रेप मामलों पर उन्होंने अपना दुख जताया है और केंद्र सरकार को इस अपराध के लिए दोषी बताया है।
ये लेटर उस वक्त सामने आया है कि जब देश में रेप की घटनाओं को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। लेटर पर हस्ताक्षर करने वालों में अधिकतर लोग भारतीय मूल के हैं। इस लेटर में लिखा है कि- “हम देख रहे हैं कि इन घटनाओं को लेकर पीएम मोदी आपने चुप्पी साध रखी है”। बता दें कि इससे पहले 49 रिटायर नौकरशाहों ने भी पीएम मोदी को ओपन लेटर लिखा था। उन्होंने लेटर में लिखा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रही है। नौकरशाहों ने जिक्र किया था कि ये काला दौर है। इसके बावजूद सरकार जिस धीमी चाल से इससे निपटने की कोशिश कर रही है, वह बहुत कमजोर है।
इन यूनिवर्सिटीज ने निकाला कैंडिल मार्च
इनमें ब्राउन यूनिवर्सिटी, द हार्वर्ड, द कोलंबिया और जानी-मानी आईआईटी समेत कोलंबिया लॉ स्कूल, बिजनेस स्कूल, टीचर कॉलेज, कोलंबिया कॉलेज, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स के बुद्धिजीवी, शिक्षक व छात्रों ने हस्ताक्षर कर विरोध जाहिर किया है। न्यूयार्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साथ आम नागरिकों ने इसके विरोध में एक कैंडल मार्च भी निकाला है।
छात्रों ने कहा – हमारा सिर शर्म से झ़ुक रहा है
कोलंबिया यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में रिपोर्टर सौम्या शंकर ने बताया है कि 120 छात्रों और शिक्षकों ने यौन उत्पीडऩ के मामले में हस्ताक्षर किए हैं। सड़कों पर छात्र निकलकर देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर लगाम कसने की मांग कर रहे हैं। आरोपियों को फांसी की सजा देने के नारे लगाए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि “ऐसी घटनाओं से भारतीय होते हुए यहां हमारा सिर शर्म से झुक रहा है”।
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