आखिर क्यों योगी सरकार युवाओं से किये गये वायदों से मुकर रही है ?
कल से लखनऊ में युवाओं (बीएड टेट 2011) के आंदोलन का युवा मंच ने किया समर्थन
ऽ जिस तरह लोक सभा चुनाव के पूर्व मोदी जी ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने के वायदे के साथ चुनाव प्रचार शुरू किया था उसी तरह अब प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में 10 लाख खाली पदों को 90 दिनों के अंदर भर्ती शुरू करने का वादा किया था। उस समय भाजपा का मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं था, अखिलेश सरकार से ऊबे युवाओं ने मोदी जी के वादे पर विश्वास कर सरकार बनवा दी।
ऽ चुनाव प्रचार में भाजपा नेताओं ने शिक्षा मित्रों से कहा कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा, बीएड टेट 2011 वालों से भी कहा उनके साथ भी अन्याय नहीं होगा उन्हें नौकरी मिलेगी और सरकार बनने के बाद तक मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री उन्हें यही दिलासा देते रहे। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से कहा गया कि 120 दिन में उनके मानदेय संबंधी मांग पर कार्यवाही होगी।
ऽ कहा गया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी, भ्रष्टारचारमुक्त व भाईभतीजावाद मुक्त बनाने के लिए सभी पुराने अध्यक्ष व सदस्यों को पदों से हटना जरूरी है, इसके लिए नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई, पुराने विज्ञापन व लंबित परीक्षायें स्थगित कर दी गईं। एक साल तक चले आंदोलन के बाद माध्यमिक, उच्चतर व अधीनस्थ को बहाल किया किया गया तो मुख्यमंत्री द्वारा ऐलान किया गया कि 2018 में 4 लाख नौकरियां मिलेंगी। फिर मुख्यमंत्री ने कहा कि फला योजना 75 लाख रोजगार पैदा होंगे, फिर कहा गया कि फला योजना अगर सफल हुई तो 45 लाख रोजगार पैदा होंगे, बयानबाजी यही नहीं रूकी फिर कहा गया कि इस योजना से 15 लाख रोजगार पैदा होंगे। कितने बार कितने लाख रोजगार पैदा होने का ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है इसे याद रखना बड़ा कठिन काम है।
ऽ अभी भर्तियां तो शुरू नहीं हुई हैं जब शुरू होंगी तब पता चलेगा कि भ्रष्टाचार मुक्त हुईं चयन संस्थाये कि नहीं। लेकिन भाईभतीजावाद व भेदभाव समाप्त करने की जवाबदेही भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों अथवा करीबियों ने आयोगों के अध्यक्ष व सदस्यों पर जगह पा कर ली है।
ऽ लोक सेवा आयोग में जरूर सरकार व आयोग में तनातनी चल रही है जिसका खामियाजा लाखों युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। युवाओं के आंदोलन के बाद भारी जन दबाव में सरकार ने जरूर लंबित परीक्षाओं को तत्काल संपन्न कराने के निर्देश आयोग के सचिव को दिये हैं। परन्तु क्या लोक सेवा आयोग में चयन प्रक्रिया पटरी पर आ पायेगी। आप इमानदारी से गौर करें कि क्या सीबीआई का मकसद आयोग में भ्रष्टाचार के असली गुनहगारों को सजा दिलाना है, पीसीएस 2011, 12 13 के मामले में एसडीएम पद पर गंभीर धांधली के आरोप लगे थे, क्या सीबीआई को इस मामले को सबसे पहले टेकअप नहीं करना चाहिए। इसका क्या जवाब है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और उनके सहयोगी तत्कालीन सचिव व परीक्षा नियंत्रक को अभी तक एक बार भी पूंछ तांछ के लिए भी नहीं बुलाया गया। क्लर्क व कम्प्यूटर आपरेटर पर कार्यवाही माहौल बनाया जा रहा है कि भ्रष्टाचार से जंग लड़ी जा रही है। सीबीआई कोर्ट में मौजूदा अध्यक्ष व सदस्यों को समन भेजने का अधिकार पाने के लिए न्यायालय में पेरवी कर रही है, क्या पूर्व अध्यक्ष व तत्कालीन सचिव/परीक्षा नियंत्रक को पूंछ तांछ के लिए बुलाने पर कहीं से रोक है या फिर कहीं से राजनैतिक दबाव है।
ऽ अगर यही हालात् रहे और यह हालात् जानबूझ कर पैदा किये जा रहे हैं तब 10 लाख खाली पदों पर भर्ती की कौन बात कहे, आंदोलन के दबाव के बाद अखिलेश सरकार ने भर्तियों के जो विज्ञापन तीसरे व चैथे साल निकाले थे 2022 तक वहीं पूरी हो जाये ंतो बड़ी बात है। सरकार अगर चाहे तो न्यायालय में कम से कम मामले जायेंगे और जो कुछ मामले जायें भी उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट बना कर जल्द से जल्द निपटारा किया जा सकता है, अभी जो हाल है 2-3 साल परीक्षा कराने में और 3-5 साल न्यायालय में निपटारा होने के बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी हो रही है।
ऽ दरअसल युवाओं को समझना होगा कि मौजूदा जो आर्थिक नीतियां चल रही है उसमें रोजगार सृजन तो दूर की बात है समाप्त हो रहे हैं, सरकारी विभागों में सारा कामकाज आउटसोर्सिंग कम्पनियों , फ्रेंचाइजी व ठेका के तहत हो रहा है। इसी लिए केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर केंद्रीय विभागों में वर्षों से खाली 5 लाख से ज्यादा पदों को खत्म कर दिया, प्रदेश सरकारें भी देर सबेर इन खाली पदों को खत्म करेंगी।
ऽ इसलिए अलग-2 समूहों में आंदोलन करने से निर्णायक दबाव नहीं बनाया जा सकता है। रोजगार के अधिकार को हासिल करने के लिए रोजगार खत्म करने वाली जन विरोधी नीतियों को उलटने के लिए लड़ाई लड़नी होगी। इसी उद्देश्य से युवा मंच का गठन किया गया है, आप इससे जुड़े और आंदोलन में हर स्तर पर सहयोग दें और सुझाव दें।
राजेश सचान
संयोजक, युवा मंच
मो0/वाट्सअप 9451627649, 9451505685
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