*उर्दू मामले का आदेश जारी:-*
मा0 जस्टिस अश्वनी मिश्र की एकल बेंच में 25 मई को उर्दू मामले की सुनवाई का आदेश जारी हो गया।
*कोर्ट ने उर्दू वालो की मांग सिर्फ इसलिए खारिज कर दी की SCERT के पाठ्यक्रम में उर्दू विषय शामिल नहीं है। साथ ही साथ सरकार के काउंटर में बताया गया कि उर्दू टीचर्स की अब कोई भर्ती नही होगी।*
जबकि ये तथ्य इस याचिका को खारिज करने के लिए पर्याप्त नही है। SCERT के पाठ्यक्रम में उर्दू वैकल्पिक विषय के रूप में अंकित है। पूरा RTE एक्ट भाषायी वैकल्पिक व्यवस्था का पक्षधर है। इसके अलावा बीटीसी प्रशिक्षुओं को इन्टर्नेरशिप में प्राथमिक स्तर पर उर्दू पढ़ाये जाने का भी सिलेबस SCERT द्वारा जारी है।पूरे भारतवर्ष में लागू NCF-2005 की रिपोर्ट उर्दू वालो को जीत की तरफ अग्रसारित करती है।
इस याचिका में कई अहम बिंदुओं को दरकिनार किया गया। या यूं कहें हड़बड़ाहट में याचिका रद्द की गई है। यदि याचिका को रद्द न किया जाता तो शिक्षक भर्ती परीक्षा का रद्दी होना तय था। शायद इसीलिए ही...........!!!
यदि उर्दू अभ्यर्थी जीवटता दिखाकर आगे तक लड़ाई लड़ेंगे,तो निश्चित मानिये उनकी जीत सुनिश्चित है। कोई भी अपैक्स कोर्ट इतने साक्ष्यों को दरकिनार नही कर सकती।
*✍🏼वैरागी*💯
©टीम रिज़वान अंसारी।।
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