इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र लोकसेवा (पूर्व सैनिक स्वतंत्रता
सेनानी व दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1993 की धारा पांच
(तीन) को असांविधानिक घोषित कर दिया है। साथ ही पुलिस भर्ती बोर्ड को 2013
की 41610 पुलिस व पीएसी कांस्टेबल भर्ती में विशेष आरक्षित कोटे के रिक्त
2312 पदों को 12 सप्ताह में भरने का निर्देश दिया है। इससे उस भर्ती में
रिक्त बचे क्षैतिज आरक्षण के कैरी फारवर्ड किए गए पदों की भर्ती का रास्ता
साफ हो गया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले व न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ
ने उपेंद्र सिंह, अजरुन यादव व मो. शोएब सहित अन्य की याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने पुलिस स्थापना बोर्ड से बचे हुए पदों की संख्या का पता लगाकर
उनमें 12 हफ्ते के भीतर नियुक्तियां पूरी करने का निर्देश दिया है।
याचिकाओं में इस भर्ती में क्षैतिज आरक्षण के बचे पदों को अगली दो भर्तियों
में कैरी फारवर्ड करने को चुनौती दी गई थी।
कहा गया कि 41610 कांस्टेबल भर्ती का विज्ञापन 20 मई 2013 को जारी हुआ और
अंतिम परिणाम जुलाई 2016 में आया। इसके बाद पता चला कि क्षैतिज आरक्षण के
2312 पद योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण रिक्त रह गए। राज्य सरकार ने 1994
की आरक्षण नियमावली के नियम तीन (पांच) के तहत अगली भर्तियों के लिए कैरी
फारवर्ड कर दिया।
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