इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग साफ सुथरी परीक्षा करा रिक्त पदों पर
योग्य अभ्यर्थियों का चयन करने के बजाए उन्हें असमंजस में रहने को मजबूर कर
रहा है। परीक्षाओं में गड़बड़ी, प्रश्नों के उत्तरों को लेकर विवाद और फिर
परीक्षाएं टालने की परंपरा बदस्तूर जारी है।
अभ्यर्थियों के सामने मुसीबत
है कि वे अपना भविष्य संवारने के लिए क्या करें। उप्र लोकसेवा आयोग की
परीक्षा को तरजीह दें या किसी अन्य राज्य की।1आयोग की ओर से परीक्षाएं
लंबित रखने, पूर्व घोषित तारीखें टालने से अभ्यर्थियों के सामने कई तरह की
दिक्कतें आ रही हैं। यूपीएससी की तीन जून को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा,
बिहार और छत्तीसगढ़ की लोकसेवा आयोग की परीक्षा भी जून और जुलाई के महीने
में है, जबकि उप्र लोकसेवा आयोग की मुख्य परीक्षा टलने से अगली छमाही में
इसकी नई तारीख निर्धारित करने से अभ्यर्थियों के सामने कठिनाई आ गई है।
अभ्यर्थी यह नहीं तय कर पाएंगे कि किस परीक्षा को प्राथमिकता दें।
गौरतलब है कि आयोग इससे पहले अपने 2018 के परीक्षा कैलेंडर में सबसे पहली
एपीएस (कंप्यूटर ज्ञान) 2013 की 11 फरवरी को होने वाली परीक्षा, 25 फरवरी
को होने वाली प्रवक्ता राजकीय इंटर कालेज (स्क्रीनिंग) 2017, एलटी ग्रेड
शिक्षक भर्ती की छह मई को प्रस्तावित परीक्षा को टाल चुका है। अब पीसीएस
2017 की मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर आयोग ने परीक्षा टालने का नया रिकार्ड
बना लिया है।
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