यह निर्णय बुधवार को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की जिला इकाई की बैठक में लिया गया। बीआरसी हनुमानगंज परिसर में हुई बैठक में संघ के जिला महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षामित्र एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें। कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की समस्याओं का तीन माह में समाधान करने का वादा किया था, लेकिन 13 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में संघर्ष के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचता है।
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विभिन्न मांगों को लेकर एक जून से लखनऊ में धरना देंगे शिक्षामित्र
बलिया। नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर एक जून से लखनऊ में संयुक्त
संघर्ष समिति की ओर से आयोजित बेमियादी धरना-प्रदर्शन में जिले के
शिक्षामित्र भी सहभागिता करेंगे।
यह निर्णय बुधवार को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की जिला इकाई की बैठक में लिया गया। बीआरसी हनुमानगंज परिसर में हुई बैठक में संघ के जिला महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षामित्र एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें। कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की समस्याओं का तीन माह में समाधान करने का वादा किया था, लेकिन 13 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में संघर्ष के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचता है।
नगरा के पूर्व ब्लाक अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि लखनऊ में शुरू होने
जा रहे धरना प्रदर्शन में जिले के दो हजार से अधिक शिक्षामित्र शामिल
होंगे। प्रदेश सरकार जबतक हमारा सेवाकाल 62 साल व प्रशिक्षित वेतनमान देने
की घोषणा नहीं कर देगी, लखनऊ से वापस नहीं लौटा जायेगा। अखिलेश पांडेय ने
कहा कि शिक्षामित्र अपना हक मांग रहे है, भीख नहीं। अध्यक्षता शिवसागर
चौहान व संचालन रमेश पांडेय ने किया। इस दौरान विनय दूबे, भरत यादव,
पृथ्वीनाथ मौर्य, अखिलेश पाण्डेय, अमित मिश्र चेला, शशिभान, मृत्युंजन
सिंह, परमात्मानंद मौर्य, राकेश पांडेय, इंदू पाठक, मधु सिंह, वन्दना
तिवारी, लक्ष्मण यादव, अशोक सिंह, बीना यादव, राजेश प्रजापति आदि थे।
यह निर्णय बुधवार को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की जिला इकाई की बैठक में लिया गया। बीआरसी हनुमानगंज परिसर में हुई बैठक में संघ के जिला महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षामित्र एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें। कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की समस्याओं का तीन माह में समाधान करने का वादा किया था, लेकिन 13 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में संघर्ष के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचता है।