इलाहाबाद : पीसीएस 2015 के जिन चयनितों से संदेह के आधार पर सीबीआइ ने
पूछताछ कर ली है उन्हें यह जानकारी किसी से साझा न करने को कहा गया है।
अपने कार्यस्थल के अलावा बैचमेट से भी सीबीआइ की ओर से पूछे गए सवालों का
जिक्र न करने की हिदायत दी गई है।
प्रोफार्मा के साथ संलग्न शपथ पत्र में
हस्ताक्षर कराते समय चयनितों को तकनीकी रूप से सीबीआइ ने प्रतिबंधित भी कर
दिया है जिससे कि पूछताछ के बिंदुओं को लीक करने पर पीसीएस अफसर फंस सकते
हैं। 1उप्र लोकसेवा आयोग से पांच साल में हुई भर्तियों की जांच कर रही
सीबीआइ ने अप्रैल में दो दर्जन पीसीएस अफसरों को समन भेजकर उनसे पूछताछ की
थी। इनके अलावा आयोग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कैंप कार्यालय
पर बुलाकर पूछताछ की थी। पीसीएस 2015 के चयनितों में जिनका चयन संदिग्ध
मिला सीबीआइ ने उन्हें समन भेजकर इलाहाबाद बुलाया। इस दौरान चयनितों से शपथ
पत्र पर हस्ताक्षर कराते हुए उन्हें चेतावनी दी गई। सीबीआइ के तकनीकी
विशेषज्ञों ने जटिल प्रोफार्मा बनाकर उसे भरवाया। जिसमें एक कॉलम यह भी रखा
गया था कि जो बातें पूछी गई हैं उसे किसी से बताएंगे या नहीं। इसका स्पष्ट
मतलब यह भी है कि सीबीआइ ने चयनितों को भले ही पूछताछ के लिए जाने दिया हो
लेकिन, लगाम अब भी जांच अधिकारियों के हाथ में है। सूत्र बताते हैं कि
2015 में चयनित पीसीएस अधिकारियों सभी करीबियों और रिश्तेदारों के बारे में
भी जानकर सीबीआइ ने चयनितों के जांच प्रभावित करने के रास्ते बंद कर दिए
हैं। जांच अधिकारी क्रास चेकिंग भी कर सकते हैं जिससे बातचीत लीक होने का
पता चल जाएगा।
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