अलीगढ़ : जिले के बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 1200 शिक्षकों पर नौकरी का
संकट मंडरा रहा है। यह संकट हाईकोर्ट के निर्णय के बाद आया है।
हाईकोर्ट ने
आदेश किया है कि 2012 से 2018 के बीच नियुक्त हुए जिन शिक्षकों की बीएड व
बीटीसी परीक्षा का परिणाम, टीईटी परीक्षा परिणाम आने के बाद आया है, उन
शिक्षकों की नियुक्ति मान्य नहीं होगी। इस आदेश के फेर में प्रदेश के करीब
50 हजार तो अलीगढ़ जिले के लगभग 1200 शिक्षकों की नौकरी फंस सकती है। 2012
के बाद प्रदेश में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती, 9770, 10800, 10000,
15000, 16448 व 12460 सहायक अध्यापक व उर्दू भर्ती के अलावा उच्च प्राथमिक
स्कूलों के लिए विज्ञान एवं गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की
भर्तियां की गई थीं। अफसरों की मानें तो इनमें से अलीगढ़ में ही केवल गणित
के 245 व विज्ञान के 245 समेत कुल 490 शिक्षक भर्ती किए गए थे। जिले के
अन्य शिक्षकों को मिलाकर करीब 1200 शिक्षक इस आदेश से सकते में हैं। अब
देखना ये है कि इनमें से कितने शिक्षकों का बीएड या बीटीसी का परिणाम टीईटी
आने के बाद आया था। हालांकि शिक्षकों का दल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
खटखटाने की तैयारी में है। उनका कहना है कि अगर किसी शिक्षक का बीएड या
बीटीसी का परीक्षा परिणाम टीईटी परिणाम के बाद आया तो इसमें शिक्षक की क्या
गलती है? शिक्षक तो परिणाम जारी करते नहीं हैं। उत्तरप्रदेशीय जूनियर
हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने कहा कि परिणाम
देरी से आने में शिक्षकों की कोई गलती नहीं होती। कहा, उन्होंने आदेश नहीं
देखा है कि न्यायालय ने किसी गड़बड़ी या अनियमितताओं के संदर्भ में ये फैसला
सुनाया है या अन्य कोई बात है। बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय का कहना है कि
अभी ये आदेश न्यायालय ने शासन को दिए हैं। शासन से जब जिले में ऐसे
शिक्षकों की सूची तैयार करने के आदेश होंगे, तब 2012 से 2018 के बीच भर्ती
हुए शिक्षकों की सूची तैयार कराई जाएगी। फिर उनमें से वे छांटे जाएंगे
जिनका बीएड या बीटीसी का परिणाम टीईटी के बाद आया हो और वे नियुक्ति पाए
हों। फिर वो सूची शासन को भेजी जाएगी।
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