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अब कॉलेजों में नए नियम से होगी शिक्षकों की भर्ती: यह हुआ नई नियमावली में अहम बदलाव

सूबे के सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक और संस्कृत कॉलेजों में नये कायदे-कानून से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया की कवायद शुरू हो गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक साहब सिंह निरंजन ने खाली पदों की सूचना मांगी है ताकि नियुक्ति प्रक्रिया तेज की जा सके।
अल्पसंख्यक एडेड कॉलेजों के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशकों से आठ जून को जबकि संस्कृत कॉलेज के लिए उप शिक्षा निदेशक संस्कृत से पांच जून को सूचना मांगी है।.
अब तक इन कॉलेजों के प्रबंधक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनुमति लेकर अपने स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति करते थे। लेकिन सरकार ने सूबे के तकरीबन 70 अल्पसंख्यक कॉलेजों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करते हुए प्रधानाचार्य व शिक्षक के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा अनिवार्य कर दी है। प्रधानाचार्य व प्रवक्ता के लिए 90 नंबर की स्क्रीनिंग परीक्षा और 10 नंबर का साक्षात्कार जबकि सहायक अध्यापक पद के लिए 100 नंबर की स्क्रीनिंग परीक्षा होगी। स्क्रीनिंग टेस्ट में रिक्त पद के लिए श्रेष्ठता के आधार पर पांच चयनित अभ्यर्थियों की अभ्यर्थी जेडी और डीआईओएस के माध्यम से संबंधित स्कूल प्रबंधक को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद स्कूल प्रबंधक प्रधानाचार्य व प्रवक्ता के लिए चयनित अभ्यर्थियों का 10 अंक का साक्षात्कार कराएंगे। जबकि सहायक अध्यापक पद के लिए मेरिट के आधार पर चयन करेंगे। वहीं दूसरी ओर सूबे के 900 से अधिक एडेड संस्कृत कॉलेजों में प्रधानाचार्य व शिक्षकों की भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को जिम्मेदारी दी गई है। .
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय दो विनियम 17 में यह निर्देश दिया गया है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थाओं में सीधी भर्ती के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, विज्ञापन कैसे किया जाएगा आदि। परन्तु इन निर्देशों में कहीं भी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक तंत्र के चयन का अधिकार पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।.

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