इलाहाबाद : उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की एक गलती से हजारों
अभ्यर्थियों को सपने टूटने के साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है।
भर्ती में आवेदन के लिए एमएड उपाधि धारकों को अनर्ह मानकर विज्ञापन संख्या
45 को रद किया जा चुका है।
अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर इससे पानी तो फिरा
ही, परीक्षा शुल्क और अन्य प्रक्रिया में खर्च हुए साढ़े छह सौ रुपये भी
आयोग ने जब्त कर लिए हैं। आयोग ने प्रवक्ता के 546 पदों पर भर्ती के लिए
दिसंबर 2010 में विज्ञापन 45 के तहत आवेदन मांगे थे। करीब 30 हजार
अभ्यर्थियों के आवेदन आए थे। सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से
परीक्षा शुल्क 600 रुपये व अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों
से 300 रुपये जमा कराए गए थे। आयोग ने शिक्षण प्रशिक्षण (बीएड/एमएड)
प्रवक्ता पद के लिए एमएड के साथ मास्टर डिग्री व बीएड में 55 प्रतिशत अंकों
सहित मास्टर डिग्री को अर्ह माना था। लेकिन, एक याचिका पर इलाहाबाद
हाईकोर्ट ने शिक्षाशास्त्र के लिए एमएड डिग्री को अनर्ह माना।
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