तबादला आदेश में पांच जिलों के प्राथमिक व 20 जिलों के उच्च प्राथमिक स्कूलों व आठ विशेष जिलों के किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण न करने का आदेश दिया। गुरुवार को तबादले की वेबसाइट शुरू होने के बाद खफा शिक्षकों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शिक्षकों का कहना है कि तबादले पिछले वर्ष के शासनादेश के तहत हुए, जिस तरह खेल शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जाते वैसे ही आदेश जारी करने से पहले नियमों में क्यों बदलाव किया गया। यदि शिक्षकों की इतनी ही कमी थी तो पहले ही यह घोषित क्यों नहीं हुआ और फिर उन जिलों के लिए आवेदन की क्यों लिए गए? जबकि 21 जिलों में पहले ही रिक्तियां शून्य थी। शिक्षकों का कहना है कि तबादलों के नाम पर खानापूरी की गई है। जिलों में आठ से नौ साल से कार्यरत शिक्षकों का तबादला नहीं हुआ है। वहीं, कई कम भारांक वालों का स्थानांतरण हो गया है। इस मामले को अब हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है।
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