प्रमोद यादव, कौशांबी : परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती में
पिछले कुछ सालों में भारी खेल हुए हैं। सेटिंग इतनी तगड़ी रही कि माफिया
बजरंगी ने युवाओं से मोटी रकम लेकर न सिर्फ नौकरी दिलाई, बल्कि स्कूलों में
ज्वाइनिंग भी करा दी। वो तो सारा खेल वेतन जारी कराने के प्रयास में पकड़
में आ गया।
शिकायत होने पर ये सभी फर्जी शिक्षक घर बैठ गए। एक पीड़ित ने
प्रतापगढ़ के रानीगंज थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है।
पीड़ित युवाओं ने बताया कि उनसे 10-10 लाख रुपये लेकर पिछले साल प्रतापगढ़
में शिक्षक बनाया गया था। ठगी के शिकार युवकों में इलाहाबाद, प्रतापगढ़,
फतेहपुर के भी हैं लेकिन अधिकतर युवा कौशांबी के हैं।
इलाहाबाद के गांव बटहा, मऊआइमा निवासी बजरंगी लाल गुप्ता कौशांबी जिला
बनने के बाद यहां आ गया था। बताया जा रहा है वह वर्ष 2000 से यहां रहने
लगा। धीरे-धीरे युवाओं को शिक्षा विभाग, रेलवे या अन्य विभागों में नौकरी
दिलाने के नाम पर ठगी करने लगा। वह खुद भी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर
शिक्षक बना, लेकिन बाद में निकाल दिया गया। नौकरी दिलाने के नाम पर
फर्जीवाड़े में उसने करोड़ों रुपये कमाए और इलाहाबाद, कौशांबी सहित कई जिलों
में प्रापर्टी बनाई। इसके जरिए भर्ती हुए कई लोग अब भी सरकारी नौकरी में है
लेकिन हाल ही में यह नया मामला सामने आया। उसकी ठगी के शिकार हुए 21
युवाओं ने खुद ही अपनी कहानी बयां की। बताया कि मामला अगस्त 2016 का है।
प्रतापगढ़ में शिक्षक भर्ती के लिए काउंसि¨लग हुई। पहले चरण की काउंसि¨लग
के बाद 21 सीटें खाली रह गई थी। इन पदों पर शिक्षक भर्ती की दूसरी काउंस¨लग
होनी थी लेकिन नहीं कराई गई। यहीं से बजरंगी लाल ने खेल शुरू किया।
पीड़ितों के अनुसार वहां पर जो अभ्यर्थी आवेदन किए थे और पहली काउंस¨लग में
चयनित नहीं हुए तो उन्हें नियुक्त कराने का उसने ठेका ले लिया। बताया कि
दूसरी काउंस¨लग अब नहीं होगी और 21 जगह खाली है। जो दस लाख रुपये देगा, उसे
वह शिक्षक बनवा देगा। उसके झांसे में आ गए। कम मेरिट वाले 21 युवाओं ने
उसे पैसे दिए और उसने उनको नियुक्ति पत्र थमाकर स्कूलों में तैनाती करा दी।
चूंकि उसकी विभाग में इतनी पकड़ थी कि इस नियुक्ति में बीएसए या बीईओ ने भी
आपत्ति नहीं की। सभी को दो जनवरी 2017 तक ज्वाइन करा दिया गया। जब दो
महीने तक वेतन नहीं बना तो नियुक्ति पर शक होने लगा। शिकायत करने पर बजरंगी
ने वेतन लगवाने के लिए और पैसे मांगे तो उसे दिए गए। उसके बाद भी वेतन तो
नहीं मिला, लेकिन फर्जीवाड़ा का शोर हो गया। तब लगा कि पकड़े गए तो जेल जाना
पड़ेगा, ऐसे में नवंबर 2017 तक सभी 21 लोग नौकरी छोड़कर घर बैठ गए। उसके बाद
से भर्ती माफिया से अपना पैसा वापस मांग रहे है। पैसा न मिलने पर कौशांबी
के पश्चिम शरीरा थाना के गांव सरपतही निवासी रमेश ¨सह ने प्रतापगढ़ के
रानीगंज थाने में चार मार्च 2018 को बजरंगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
फिलहाल बजरंगी पैसा लेकर फरार है।
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