आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2018 की
लिखित परीक्षा से रविवार को आधे परीक्षार्थियों ने किनारा कर लिया। महज
52.03 फीसद अभ्यर्थी परीक्षा देने केंद्रों पर पहुंचे। उप्र लोकसेवा आयोग
यानी यूपी पीएससी में जहां इस परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में आवेदन करने
का रिकॉर्ड बना, वहीं करीब साढ़े तीन लाख परीक्षार्थियों के इम्तिहान
छोड़ने का भी रिकॉर्ड बन गया है।
यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि परीक्षा
केंद्र निर्धारण से लेकर प्रवेशपत्र आवंटन में जमकर मनमानी हुई। 1प्रदेश के
राजकीय माध्यमिक कालेजों में 10768 एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की लिखित
परीक्षा कराने की जिम्मेदारी शासन ने यूपी पीएससी को सौंपी थी। इतनी बड़ी
संस्था को पहली बार यह जिम्मेदारी सौंपने की वजह यह रही कि अभ्यर्थियों का
चयन लिखित परीक्षा के अंकों से ही होना है, योगी सरकार साक्षात्कार नहीं
करा रही है। इन पदों के लिए कई विषयों के अर्हता विवाद के बाद ऑनलाइन व
ऑफलाइन सात लाख 63 हजार 317 आवेदन हुए। यूपी पीएससी ने आवेदकों की अर्हता व
पात्रता की जांच किए बिना सशर्त परीक्षा में बैठने की अनुमति दी। परीक्षा
के लिए 39 जिलों के 1760 केंद्र तय हुए। चंद दिन पहले छह जिलों के 10
परीक्षा केंद्र बदले या फिर नाम संशोधित हुए और दो दिन पहले अभ्यर्थियों की
अर्हता मान्य करने का अंतिम निर्णय हुआ। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को
दो-दो प्रवेशपत्र जारी किए गए और जिलों को विषय और लड़के व लड़कियों के नाम
पर बांटा गया। यूपी पीएससी की लचर परीक्षा तैयारी का असर अभ्यर्थियों की
उपस्थिति के रूप में सामने आया है। प्रदेश भर में महज 52.03 फीसद यानी करीब
चार लाख ही परीक्षा देने पहुंच सके और करीब इतने ही अभ्यर्थियों ने
परीक्षा को बॉय-बॉय किया।
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