कहा कि सिपाही भर्ती में पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से याची को आरक्षित श्रेणी में स्वीकार करने से इन्कार करना उचित नहीं है। कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह याची को अनुसूचित जाति का मानते हुए आदेश पारित करें। साथ ही स्पष्ट किया कि जाति प्रमाणपत्र की जांच, नियुक्ति पत्र जारी करते समय की जा सकती है। लेकिन, फार्मेट में न होने से सरकारी अधिकारी की ओर से जारी प्रमाणपत्र को अमान्य करना उचित नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने अजीत कुमार की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता रीतेश श्रीवास्तव ने बहस की। याची का कहना था कि उसने निर्धारित न्यूनतम अंक से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, फिर भी उसे दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल जांच के लिए नहीं बुलाया गया। सरकारी वकील का कहना था कि गौरव शर्मा केस के फैसले के अनुसार फार्मेट में जाति प्रमाणपत्र न होने से अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में माना जाएगा। जबकि, कोर्ट ने इस फैसले को इस केस में लागू नहीं माना।
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