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बीएड डिग्रीधारकों को वरीयता के विरोध में उतरे बीटीसी प्रशिक्षु

औरैया: राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा जारी अधिसूचना में संशोधन करते हुए प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता दिए जाने को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
एसडीएम सदर अमित राठौर को सौंपे ज्ञापन में संयुक्त प्रशिक्षु मोर्चा बीटीसी प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश प्रताप सिंह ने बताया है कि प्राथमिक स्कूलों में बीएड डिग्रीधारको को सरकार की ओर से मौका देने से वह नाराज है। सोमवार से बीटीसी व डीएलएड प्रशिक्षुओं ने विरोध शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने अधिसूचना जारी करते हुए कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रारंभिक शिक्षाशास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को योग्य माना गया। एनसीटीई की इसी सूचना द्वारा शिक्षा स्नातक बीएड को छह से आठ तक अध्यापन हेतु योग्य माना गया। संगठन के अध्यक्ष गीतेश राजपूत ने बताया कि 10 सितबंर 2012 को मानव संसाधन विकास मंत्रलय द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य को छूट दी गई कि वह बीएड अभ्यर्थियों को छह माह का प्रशिक्षण देकर प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति की जा सकती है। उन्होंने सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए मांगें पूरी कराए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में मंगल सिंह, ऋतुराज, कपिल, निधि, एकता, गौरव कुशवाहा, नेहा, शिवम, आरती तिवारी, मोहिनी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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