Important Posts

Advertisement

Govt Jobs : Opening

प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के अध्यापकों एवं कर्मचारियों के स्वीकृत पदों का कम्प्यूटराइज्ड डाटा उपलब्ध है या नहीं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि यदि डाटा उपलब्ध नहीं है तो इसे कितने समय में तैयार कर लिया जाएगा।
गुरुवार को जारी एक नोटिस में कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश में कितने अध्यापक और कर्मचारी इस शिक्षा सत्र में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। जस्टिस एस.पी.केशरवानी की कोर्ट ने प्रबंध समिति नागेश्वर प्रसाद पी.एम.वी.स्कूल देवरिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से यह सवाल किया है।


कोर्ट ने कहा कि, धारा 25 के तहत अध्यापक या कर्मचारी का पद रिक्त होते ही स्वतः ऐसे खाली पदों को भरने का सिस्टम बनाया जा सकता है। जिससे पद खाली होने पर भर्ती विज्ञापन की अधिकारियों से अनुमति लेने की जरूरत ही ना पड़े। कोर्ट ने पूछा कि, अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सत्र शुरू होते ही अध्यापकों की जरूरत पूरी करने में बाधा पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या अर्थदंड लगाया जाना चाहिए, जिससे स्टाफ और शिक्षक की कमी के चलते बच्चों की पढ़ायी बाधित ना हो। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख पर प्रमुख सचिव और बीएसए से व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा है।

'छात्र संख्या के आधार पर हो शिक्षक'

याचिका में कहा गया है कि अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के तहत बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार है। संस्था प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल की कक्षा चलाती है। जहां केवल चार शिक्षक ही है। अतिरिक्त पदों पर भर्ती विज्ञापन निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कोर्ट ने कहा कि छात्र संख्या के आधार पर स्टाफ और अध्यापक होने चाहिए, जिससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ ना पड़े। अदालत ने कहा कि इसके लिए कम्प्यूटराइज्ड डाटा तैयार करना बेहतर विकल्प है।

ليست هناك تعليقات:

إرسال تعليق

UPTET news