सितंबर, 2017 में शहंशाहपुर में आयोजित पीएम मोदी की जनसभा में शिक्षामित्रों के विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण जिला पुलिस और खुफिया इकाइयों की खासी किरकिरी हुई थी।
इसे लेकर एसपीजी के अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई थी और मामले को लेकर हंगामा करने वालों के खिलाफ रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। हंगामा करने वाले सभी शिक्षामित्र गले पर भगवा गमछा डाल कर और कार्यक्रम का पास लेकर जनसभा में शामिल हुए थे।
इसलिए इस बार जो भी कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र लेकर जनसभा में जाएंगे उनकी विधिवत चेकिंग और तस्दीक करने के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे पहले सितंबर, 2015 में डीरेका खेल मैदान में आयोजित प्रधानमंत्री की जनसभा में शिक्षामित्रों ने हंगामा किया था और उन्हें भाषण रोकना पड़ा था।
पूर्व की इन गंभीर त्रुटियों को केंद्रीय खुफिया इकाइयों ने गंभीरता से लिया है और अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश पुलिस के साथ ही लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को दिया है।
इस संबंध में पूछे जाने पर पुलिस अधिकारियों का कहना था कि जनसभा में मौजूद लोगों के बीच सादे कपड़ों में पुलिस और खुफिया इकाइयों के जवान तैनात रहकर सभी की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का प्रयास करने वाले कानूनी कार्रवाई की जद में आएंगे।
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