वहीं, अभ्यर्थी अनिल परिहार की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने यूपी पीएससी (उप्र लोकसेवा आयोग) को जानकारी देने के लिए कहा है।
यूपी पीएससी ने आरओ, एआरओ भर्ती की प्रतीक्षा सूची जारी करने के संबंध में आदेश को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी है। यूपी पीएससी का कहना है कि प्रतीक्षा सूची जारी करने संबंधी आदेश हाईकोर्ट की एक खंडपीठ से रद हो चुका है। इसलिए अन्य दो मामलों में कोर्ट की ओर से दिए गए इसी प्रकार के आदेश को वापस लिया जाए। याची के अधिवक्ता अमित कुमार का कहना था कि आरओ, एआरओ के 433 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 43 पद रिक्त रह गए थे। इन पदों पर भर्ती के लिए यूपी पीएससी ने प्रतीक्षा सूची नहीं जारी की। इसके खिलाफ अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए। यूपी पीएससी का कहना था कि 1999 के शासनादेश में सरकार ने प्रतीक्षा सूची जारी नहीं करने का आदेश दिया है। इस शासनादेश को हाईकोर्ट ने त्रिलोकीनाथ केस में रद कर दिया और प्रतीक्षा सूची जारी करने का आदेश दिया। इसके बाद विनय कुमार सिंह व राकेश सिंह ने भी अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कीं। जिनमें कोर्ट ने त्रिलोकीनाथ केस के आलोक में प्रतीक्षा सूची जारी करने का निर्देश दिया। इस मामले की 11 जुलाई को सुनवाई हुई थी जिसमें यूपी पीएससी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने यूपी पीएससी के सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया।1 हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सचिव अधिवक्ता के जरिए जवाब दाखिल करते हैं तो उन्हें हाजिर होने की आवश्यकता नहीं है। 18 जुलाई को यूपी पीएससी के अधिवक्ता ने कोर्ट ने उपस्थित होकर बताया कि त्रिलोकीनाथ केस का आदेश विशेष अपील में रद हो चुका है। चूंकि दो अन्य मामलों में भी हाईकोर्ट ने प्रतीक्षा सूची जारी करने का आदेश दिया है इसलिए उन आदेशों को भी वापस लेने के लिए अर्जी दाखिल की गई है जिस पर निर्णय होना है।
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