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UP: फर्जी बोर्ड का भंडाफोड़, 6 शिक्षकों समेत 26 पर केस

लखनऊ  कासगंज और गाजियाबाद से संचालित हो रहे फर्जी बोर्ड की मार्कशीट लगाकर छह लोग यूपी में सहायक शिक्षक बन गए। बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन, मध्य भारत, ग्वालियर नाम के फर्जी बोर्ड से जुड़े 26 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने लखनऊ और गाजियाबाद में एफआईआर दर्ज करवाई है।
इसमें यूपी के भी छह सहायक अध्यापक शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि सीबीआई की जांच में फर्जी बोर्ड की मार्कशीट लगा कर नौकरी पाने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। सीबीआई देहरादून के ऐंटी करप्शन ब्यूरो के अडिशनल एसपी अखिल कौशिक की ओर से दो एफआईआर दर्ज करवाई गई हैं।


सीबीआई की पड़ताल में खुलासा हुआ कि कासगंज में बोर्ड आॅफ सेकंडरी एजुकेशन, मध्य भारत, ग्वालियर की स्थापना गंगा दयाल शाक्य द्वारा 17 जुलाई 2010 को ट्रस्ट डीड के जरिए पटियाली तहसील में की गई। बोर्ड दो जगह से संचालित हो रहा था। इसका एक दफ्तर गंगा दयाल शाक्य ने गंज डुडवारा के गणेशपुर के सद्भावना नगर स्थित अपने घर में और दूसरा ग्वालियर के गांधी रोड के सत्यदेव नगर के शांति निकेतन स्थित किराए के भवन में बनाया।

वहीं, गाजियाबाद में महेश चंद्रवंशी ने 30 सितंबर 2011 को बोर्ड की स्थापना की। इसका एक दफ्तर मोदीनगर के बिसोखर रोड स्थित महेश के स्कूल जीवक राष्ट्रीय विद्यापीठ, संतपुरा से और दूसरा ग्वालियर के गांधी नगर स्थित किराए की बिल्डिंग से संचालित हो रहा था।

बोर्ड 2010-11 में बना, मार्कशीट 1998-99 की
दस्तावेज के मुताबिक, कासगंज वाले बोर्ड की स्थापना 17 जुलाई 2010 को और गाजियाबाद वाले की स्थापना 30 सितंबर 2011 को हुई। जबकि यूपी में सहायक शिक्षक की नौकरी पाने वाले छह लोगों को वर्ष 1998 और 1999 की मार्कशीटें जारी कर दी गईं।

सीबीएसई के सदस्य नहीं
सीबीआई की पड़ताल में खुलासा हुआ कि ये दोनों ही बोर्ड दिल्ली स्थित काउंसिल ऑफ बोड‌्र्स ऑफ स्कूल एजुकेशन (सीओबीएसई) के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, परीक्षा करवाने वाले बोर्ड को इस काउंसिल का सदस्य होना जरूरी है। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा परिषद और भोपाल के माध्यमिक शिक्षा मंडल से भी जानकारी ली तो पता चला कि बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन, मध्य भारत, ग्वालियर किसी भी तरह की परीक्षा करवाने और सर्टिफिकेट देने के लिए मान्य नहीं है।

शिक्षक भर्ती से जुड़े हो सकते हैं तार
फर्जी बोर्ड के मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के तार यूपी में वर्ष 2010 के बाद हुए सहायक अध्यापक भर्ती घोटाले से जुड़ सकते हैं। हाल ही में एसटीएफ ने अकेले मथुरा जिले में 150 शिक्षकों की फर्जी तरीके से हुई भर्तियों का खुलासा किया था। उसमें सामने आया था कि बड़े पैमाने पर फर्जी मार्कशीट व अन्य दस्तावेज तैयार कर अपात्रों ने अपनी नियुक्तियां करवा लीं। एसटीएफ के खुलासे के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार ने वर्ष 2010 के बाद यूपी में हुई करीब 1.57 लाख शिक्षकों की भर्तियों की जांच के आदेश दे दिए हैं। जल्द ही सीबीआई और यूपी सरकार इस मामले में जानकारियों का आदान प्रदान कर सकते हैं।

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