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68500 शिक्षक भर्ती परीक्षा में गलत जगह पर उत्तर लिखकर गंवाए अंक, कटिंग-ओवर राइटिंग के चलते चयन से कई बाहर अभ्यर्थियों ने प्रश्नों का सही जवाब दूसरे स्थानों पर लिखा

इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती 28 की लिखित परीक्षा में साठ फीसदी से अधिक अभ्यर्थी असफल हुए हैं। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के परिणाम गले नहीं उतर रहा है।
असफल अभ्यर्थी लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने तय उत्तीर्ण प्रतिशत से अधिक प्रश्नों का जवाब सही दिया है लेकिन, अंक बेहद कम मिले हैं। उनका आरोप है कि इसमें धांधली हुई है, इसे कोर्ट में भी चुनौती दी जा रही है।

परिषद के प्राथमिक स्कूलों की 68500 शिक्षक भर्ती का 13 अगस्त को रिजल्ट आने के बाद से परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं। इस मामले की परीक्षा नियामक कार्यालय में गोपनीय जांच हुई। जिन अभ्यर्थियों ने शासन तक शिकायतें की उनकी उत्तर पुस्तिकाएं देखी गईं। इसमें चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। अभ्यर्थियों का यह दावा सही है कि उन्होंने कई प्रश्नों के जवाब सही लिखे हैं लेकिन, सही लिखकर नंबर क्यों कटे इस पर अधिकांश ने गौर नहीं किया। प्रश्नों के सही जवाब कई अभ्यर्थियों ने निर्धारित स्थान पर नहीं दिया है। उत्तर पुस्तिका में प्रश्नों का जवाब देने के लिए क्रमांक अंकित था, उन्हीं स्थानों पर हर प्रश्न का जवाब लिखा जाना था, तमाम अभ्यर्थियों ने प्रश्नों के सही जवाब गलत क्रमांक के सामने दर्ज किया है। इससे जिन उत्तरों में उन्हें पूरे अंक मिलने चाहिए वह शून्य हो गए हैं। कई ने दूसरी जगह उत्तर लिखकर कॉपी पर निशान बना दिया है कि इसे फलां प्रश्न का उत्तर माना जाए। साथ ही ओवर राइटिंग और कटिंग भी उत्तर पुस्तिकाओं में जमकर की गई है।
प्रश्न पुस्तिका के महत्वपूर्ण अनुदेश में स्पष्ट लिखा है कि प्रश्नों का उत्तर तय स्थान पर और एक ही जवाब देना है, स्थान बदलने या अधिक उत्तर देने पर उसका मूल्यांकन नहीं होगा। ऐसे ही ओवरराइटिंग पर भी निर्देश दिया है लेकिन, अभ्यर्थियों ने उनका पालन नहीं किया। ज्ञात हो कि भर्ती की लिखित परीक्षा से लेखन क्षमता भी जांची जानी थी। कई ने जवाब लिखते समय वर्तनी की अशुद्धियां की हैं। परिणाम जारी होने के पहले उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ने से सफल होने वालों की तादाद तेजी से घट गई।
निष्पक्ष जांच की मांग : तमाम अभ्यर्थियों ने परीक्षा में शून्य व एक अंक मिलने को तूल देते हुए आरोप लगाया है कि कॉपियों के मूल्यांकन में जमकर मनमानी हुई है। शासन निष्पक्ष जांच कराए, ताकि वह भी शिक्षक बन सके। उनका सवाल है कि सही जवाब देने के बाद भी वह अनुत्तीर्ण कैसे हो सकते हैं।

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