विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में 200 से अधिक नियुक्तियां हुई थीं। इसमें आईएमएस, विज्ञान संस्थान, कृषि विज्ञान संस्थान, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, कला संकाय आदि शामिल हैं।
पहले लोगों ने आरटीआई से जानकारी मांगी। जब विश्वविद्यालय की ओर से मिले कागजातों में अनियमितता की पुष्टि होने पर राष्ट्रपति, यूजीसी समेत कई जगहों पर शिकायतें की गई थी। हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई, जिस पर 28 मई को कोर्ट ने आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रत्यावेदन मिलने के दो माह के भीतर कुलपति को जांच कराकर निस्तारण करने का आदेश दिया था।
सूत्रों की माने तो शिकायतकर्ताओं ने जिन शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की है, उन्हें नई जिम्मेदारियां भी दे दी गई हैं। एक प्रोफेसर को अगस्त के पहले सप्ताह में एक सेंटर का इंचार्ज बना दिया गया है। उनकी नियुक्ति प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई है। अभी वह जांच के दायरे में भी है। इस आदेश के बाद कुछ लोगों ने कुलपति से मिलकर इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी।
कुलपति प्रो. राकेश भटनागर का कहना है कि इंटरनल क्वालिटी एश्यारेंस सेल (आईक्यूएसी) की देखरेख में नियुक्तियों में अनियमितताओं की जांच पारदर्शिता से कराई जा रही है। तय समय से जांच पूरी करा ली जाएगी।
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