इलाहाबाद : जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी अब सिर्फ
स्कूलों की मॉनीटरिंग ही नहीं करेंगे, वरन शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार न
होने पर दोषी माने जाएंगे।
उन पर शासन दंडात्मक कार्रवाई भी करेगा। बेसिक
शिक्षा निदेशक ने स्कूलों का सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं साथ ही
किस अफसर को प्रतिमाह कितने स्कूलों का निरीक्षण करना है यह भी तय किया है।
1प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में छात्र संख्या में गिरावट
आई है। इसका कारण वहां पढ़ाई न होने को ही माना गया है। वैसे 11 अगस्त,
2014 से हर साल स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी अफसरों को दी जा रही है
लेकिन, निरीक्षण के नाम पर खानापूरी होने से सुधार नहीं हो रहा है। इसीलिए
पुराने शासनादेश में बदलाव करके नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया
है कि हर शिक्षा अधिकारी जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों का कम
से कम दो बार अनिवार्य रूप से देखे। इस दौरान पठन-पाठन प्रक्रिया और
छात्रों की उपस्थिति विशेष रूप से देखी जाएगी। इसके अलावा स्कूल में उपलब्ध
संसाधन व मिडडे-मील वितरण आदि की कड़ाई से निगरानी होगी। 1यह भी निर्देश
है कि स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या से अधिक बच्चे दिखाकर यूनीफार्म,
किताबें, बैग, जूता व मिडडे-मील का भुगतान किसी दशा में न हो सके। निरीक्षण
के समय छात्र कम होने पर प्रधानाध्यापक व अध्यापकों को उत्तर दायित्व देते
हुए उसे निरीक्षण पंजिका में अंकित किया जाएगा। 1अगले माह फिर उसी स्कूल
का निरीक्षण करके हकीकत देखी जाएगी। इसके लिए हर स्कूल में अलग से निरीक्षण
पंजिका रखी जाए। जो अफसर स्कूल जाएंगे व अपनी आख्या सहित हस्ताक्षर और
पदनाम भी अंकित करेंगे। ऐसे ही शिक्षकों के गैरहाजिर होने पर आवश्यक
कार्रवाई होगी। यह भी कहा गया है कि कक्षा एक व दो के बच्चों को अक्षर व
अंकों का ज्ञान नहीं होता है। इसका प्रतिदिन अभ्यास कराया जाए। यही नहीं
अफसर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं या फिर ऑनलाइन सूचनाएं समय से नहीं
दे रहे हैं। निर्देश है कि निरीक्षण की सूचना देने में विलंब करने वालों पर
कार्रवाई की जाए।
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