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शिक्षामित्रों को एक बार फिर से आखिरी मौका , बीएसए दफ्तर में इन दिनों शिक्षामित्र भटकने को मजबूर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। बीएसए दफ्तर में इन दिनों शिक्षामित्र भटकने को मजबूर हैं। यह शिक्षामित्र मूल तैनाती व विकल्प के बीच में फंसकर रह गए हैं। शनिवार को भी यहां यही वाकया देखने को मिला। दर्जनों शिक्षामित्र यहां आए हुए थे।
किसी का प्रत्यावेदन स्वीकार नहीं किया गया था तो किसी को विकल्प के आधार पर स्कूल ही नहीं मिला। इन शिक्षामित्रों में महिलाओं की संख्या अधिक थी।

बता दें कि अगस्त के प्रथम व द्वितीय सप्ताह तक सभी शिक्षामित्रों को मूल तैनाती वाले स्कूल में भेजने के लिए शासनादेश आया था। इस शासनादेश में महिलाओं के लिए रियायत भी दी गई थी।

जिसमें उल्लिखित था कि महिलाएं वर्तमान तैनाती वाले स्कूल, ससुराल या पति के घर के क्षेत्र वाले स्कूल मूल तैनाती वाले स्कूल की जगह भी चुन सकती हैं। जबकि शनिवार को कुछ ऐसी ही महिलाएं बीएसए दफ्तर आईं और उन्होंने अपनी शिकायतें बीएसए को सौंपी।

इनमें से कुछ तो प्रत्यावेदन के आधार पर अपना स्कूल बदलना चाह रहीं थीं, लेकिन दावेदार अधिक होने के कारण यहां काउंसलिंग होगी।

वहीं, धनीपुर ब्लाक के एक विद्यालय में तो वर्तमान तैनाती वाली महिला के प्रत्यावेदन को अस्वीकार कर नई महिला के प्रत्यावेदन को स्वीकार कर लिया गया। ऐसे में बीएसए ने तुरंत एबीएसए को तलब कर त्रुटि सुधारने को कहा।

यहां गौरतलब हो कि एक से अधिक दावेदारी पर शिक्षामित्रों की काउंसिलिंग होगी, इसके बाद ही उन्हें तैनाती दी जाएगी। इस संबंध में बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत ने बताया कि यह शिक्षामित्र अपनी गलती के कारण भटक रहे हैं।

यह मूल स्कूलों में भी नहीं गए साथ ही विकल्प भी नहीं भरा। अब जो आदेश का पालन नहीं करेगा वह भटकेगा ही। फिर भी हम शिक्षामित्रों को एक बार फिर से आखिरी मौका और देंगे।

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