आगरा। स्कूलों में मिड डेमील बनवाते हुए और साफ सफाई
कराते हुए यदि आपको शिक्षक दिखें तो चौंकिए नहीं। परिषदीय विद्यालयों के
शिक्षक इन दिनों चपरासी और क्लर्क दोनों का काम कर रहे हैं। शिक्षकों के
हवाले स्कूल में बच्चों की संख्या, गंदगी, निर्माण में खामी, स्कूल की
रिपोर्ट में गलती जैसे अनेक कमियों के दोष दिया जाता है।
लेकिन हकीकत पर
गौर किया जाए तो हालात ऐसे हैं कि शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना
पड़ रहा है। शिक्षक कार्य करने वाले अध्यापकों के जिम्मे पूरे स्कूल का काम
आ गया है। चपरासी की भर्ती ना होने से शिक्षकों पर काम का बोझ आ रहा है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि ऐसा लगता है जैसे चपरासी और क्लर्क के पद
परिषदीय विद्यालयों में खत्म हो गए हैं।
माथे पर चिंता की लकीरें
बेसिक स्कूलों में तैनात
शिक्षकों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा सकती हैं। स्कूल खुलते ही
उनकी बेचैनी शुरू हो जाती है। स्कूल में समय से पहले पहुंचकर स्कूल की साफ
सफाई, बच्चों के लिए मिड डेमील तैयार करवाना और शैक्षिक गुणवत्ता का स्तर
बढ़ाने का तनाव हावी हो जाता है। प्राथमिक शिक्षक संघ के नगर मंत्री राजीव
वर्मा ने बताया कि शिक्षकों को कई कार्य करने पड़ रहे हैं। स्कूलों में
शिक्षकों का अभाव है। कई स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक तैनात है और उसे
ही सभी कक्षाओं का भार दिया गया है। गैर शैक्षणिक कार्य के चलते शिक्षा
प्रभावित होती है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया है लेकिन कोई
सुनवाई नहीं होती।
शिक्षकों पर अब इन जिम्मेदारियों का भार
प्रधानाध्यापक
अब पहले ही तरह अपनी मनमर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते हैं अधिकारियों
द्वारा तय होता है। स्कूलों में आदेश और निर्देश दे दिए जाते हैं।
अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। कई विद्यालयों में एक से
अधिक शिक्षक नहीं है। ऐसे में पढ़ाई का काम बाधित होता है। शिक्षकों के पास
चपरासी और क्लर्क नहीं हैं, ऐसे में उन्हें ही स्कूल का पूरा कार्यभार
देखना पड़ता है। शिक्षकों के लिए अब स्कूल चलो अभियान, बाल गणना, पल्स
पोलियो, ड्रेस वितरण, एमडीएम बनवाना, ग्राम शिक्षा समिति की बैठक, रसोइयों
की चयन, शिक्षा निधि के खाते का प्रबंधन, बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी,
बीएलओ की ड्यूटी, पौधारोपण, शिक्षण कार्य, जनगणना, रैपिड तैयार करना,
बच्चों को घर से बुलाना और विद्यालय की सफाई के साथ साथ जिला स्तरीय
अधिकारियों के आदेशों का पालन करने की जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें निभाना
है। ऐसे में शिक्षक स्कूलों में शैक्षिक कार्यों पर कितना फोकस कर सकेंगे,
ये भली भांति सभी जान और समझ सकते हैं।
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