इलाहाबाद : प्रदेश सरकार विभिन्न महकमों में भर्तियों की रफ्तार तेज
करने का निर्देश दे रही है, वहीं सूबे के अशासकीय माध्यमिक कालेजों की नौ
हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही है।
सितंबर
में होने वाली लिखित परीक्षा को पहले ही स्थगित किया जा चुका है, 12 जुलाई
को जिन विषयों के पद निरस्त हुए उन अभ्यर्थियों से आवेदन लेना भी अब तक
शुरू नहीं हुआ है। इस भर्ती पर चयन बोर्ड और शासन दोनों ने चुप्पी साध ली
है।
चयन बोर्ड ने अशासकीय कालेजों में प्रवक्ता व स्नातक शिक्षकों के चयन के
लिए पहली बार 2016 में ऑनलाइन आवेदन लिए। नौ हजार से अधिक पदों पर करीब दस
लाख अभ्यर्थियों ने दावेदारी कर रखी है। इसकी लिखित परीक्षा पहले अक्टूबर
2016 में ही कराने की तैयारी हुई लेकिन, उसे टाल दिया गया। अप्रैल 2018 में
चयन बोर्ड का पुनर्गठन होने के बाद प्रतियोगियों की नाराजगी पर 23 मई को
फिर लिखित परीक्षा की तारीखें तय हुईं। इसी बीच 12 जुलाई को चयन बोर्ड ने
2016 विज्ञापन के आठ विषयों के पद इस आधार पर खत्म करने का एलान किया कि
माध्यमिक कालेजों में इनकी पढ़ाई नहीं हो रही है। इसके साथ ही सितंबर में
होने वाली लिखित परीक्षा भी स्थगित हो गई। यह भी कहा गया कि आठ विषयों के
अभ्यर्थियों से दूसरे विषयों के लिए जल्द ही ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इस
निर्णय का एक माह हो रहा है अब तक न तो लिखित परीक्षा की नई तारीख तय हो
सकी है और न ही अभ्यर्थियों से आवेदन लेना शुरू हो पाया है। यह जरूर है कि
2011 की लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के परिणाम रह-रहकर घोषित हो रहे हैं।
यूपी पीएससी ने करा दी परीक्षा
उप्र लोकसेवा आयोग ने 29 जुलाई को एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की लिखित
परीक्षा उन विषयों की भी करा दी, जिसे चयन बोर्ड ने रद कर दिया है। यह
मामला कोर्ट तक पहुंचा लेकिन, परीक्षा पर रोक नहीं लग सकी। यूपी पीएससी इस
भर्ती का रिजल्ट तैयार कराने में जुटा है।
प्रस्ताव अनुमोदन व समिति नहीं
चयन बोर्ड में विज्ञान आदि विषयों की अर्हता बदलने का प्रस्ताव यूपी बोर्ड
ने भेजा है, उसका अब अनुमोदन नहीं हुआ है। इसी बीच तीन वरिष्ठ अधिकारियों
की समिति बनाने की चर्चा हुई, वह भी अब तक गठित नहीं हो सकी है।
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