शिक्षक भर्ती पर राज्य सरकार के अधिक जोर के बावजूद शिक्षक भर्ती 2018
के परिणाम पर उप्र लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) का रवैया पुराने र्ढे पर है।
इस भर्ती परीक्षा को लेकर उत्साहित अभ्यर्थियों को जिस तरह
से डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने परिणाम जल्द आने का
संकेत देकर राहत दी थी यूपीपीएससी उसके विपरीत चल पड़ा है। परीक्षा होने से
पूरे तीन महीने यानि अक्टूबर माह के अंत तक भी परिणाम देने की कोई तैयारी
नहीं है वह भी ऐसी स्थिति में जब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्कैनिंग
मशीन से होना है।1राजकीय माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के 10768 रिक्त
पदों पर चयन के लिए लिखित परीक्षा 29 जुलाई को हुई थी। पौने चार लाख
अभ्यर्थी इसमें शामिल हुए थे।
पहले उम्मीद लगाई जा रही थी कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल होने
के चलते इसका परिणाम एक से डेढ़ महीने में आ जाएगा। 29 जुलाई को ही डिप्टी
सीएम दिनेश शर्मा ने भी एक सभा के दौरान इसके संकेत देकर शिक्षक बनने बनने
को लालायित युवाओं के मन में ऊर्जा का संचार किया था। 1वहीं यूपीपीएससी ने
इसके ढाई महीने बाद भी परिणाम के कोई संकेत नहीं दिए हैं। 28 अक्टूबर को
पीसीएस और वन विभाग की संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी में जुटे
यूपीपीएससी के सामने पहले से भी कई परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की बड़ी
चुनौती है। ऐसे में अक्टूबर माह के अंत तक भी शिक्षकों का भर्ती परिणाम आना
संभव नहीं है। सचिव जगदीश का कहना है कि शिक्षक भर्ती का परिणाम नवंबर में
दिया जा सकता है। जबकि इसमें भी उनका मजबूती से दावा नहीं है।
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