एटा। फर्जी प्रमाणपत्र धारकों पर एक बार फिर शिकंजा कसने लगा है। बीएसए ने
2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के शैक्षिक, जाति, निवास आदि प्रमाणपत्रों के
साथ डॉ बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय की डिग्रियों की आनलाइन सत्यापन
रिपोर्ट एक सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अमर उजाला में छपी खबर के बाद चेते शिक्षा विभाग ने संदिग्ध प्रमाणपत्र
धारकों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। एसआईटी सूची व अन्य शिकायतों से इतर
विभाग ने वर्ष 2010 के बाद नियुक्त सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को जांच दायरे
में लिया है। गुरुवार को बीएसए संजय कुमार शुक्ल ने खंड शिक्षा अधिकारियों
को वर्ष 2010 के बाद नियुक्त सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को सभी शैक्षिक
अंकपत्र-प्रमाणपत्र, जाति, निवास, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता
संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र आदि अभिलेखों की स्वप्रमाणित पत्रावली एक सप्ताह
के अंदर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि
में प्रमाणपत्र प्रस्तुत न करने वाले शिक्षक शिक्षिकाओं का नवंबर माह का
वेतन रोक दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार जिले में 2010 के बाद नियुक्त
शिक्षकों की संख्या आठ सौ से एक हजार के बीच है।
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यह है मामला?
जिले में फर्जी डिग्री धारक शिक्षकों की शिकायतें होती रही हैं। आरोप है कि
जिले में दर्जनों फर्जी डिग्री धारक शिक्षक शिक्षिकाएं विभागीय मिलीभगत से
नौकरी कर रहे हैं। एसआईटी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में भी जिले के सौ
से अधिक शिक्षकों को फर्जी डिग्री मामले में चिन्हित किया गया था।
तत्कालीन बीएसए ने इन्हें नोटिस जारी कर प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के
आदेश दिए थे।
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