भर्ती संस्थाओं में शिक्षकों के चयन से ज्यादा विवाद सामने आ रहे हैं।
अब यूपीएचईएससी यानि उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग से विज्ञापन 46 के
तहत हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का परिणाम भी घोटाले का साया मंडरा रहा
है।
21 मार्च, 2014 को जारी विज्ञापन के जरिये 1652 पदों पर चयन की
प्रक्रिया तत्कालीन कार्यवाहक सचिव संजय सिंह के कार्यकाल से विवादित हुई
तो 25 अगस्त, 2018 को सभी विषयों (दो विषय को छोड़कर ) के परिणाम जारी होने
के बाद विवाद और गहरा गया है। इस भर्ती में अनियमितता के गंभीर आरोप लिखित
परीक्षा के बाद से ही लगने लगे थे। तत्कालीन अध्यक्ष लाल बिहारी पांडेय ने
271 ओएमआर शीट सादी जमा होने का राजफाश किया था और उस समय एक अधिकारी पर
अपने चहेतों को नियुक्ति दिलाने की साजिश रचने का भी आरोप लगा था।
ओएमआर की स्कैनिंग के दौरान खाली ओएमआर शीट जमा होने की बात पता चली थी।
फिलहाल परीक्षा पूरी होने और परिणाम भी जारी होने के बावजूद सादी ओएमआर शीट
पर यूपीएचईएससी ने अपना निर्णय उजागर नहीं किया, जबकि पिछले दिनों अचयनित
अभ्यर्थियों की ओर से स्क्रीनिंग परीक्षा व साक्षात्कार में मिले अंकों में
जबर्दस्त उतार चढ़ाव के आकड़े सार्वजनिक किए गए। जिससे भाजपा सरकार में
यूपीएचईएससी में महत्वपूर्ण पदों पर बैठाए गए सभी नए चेहरे भी विवाद के दाग
को धोने में सफल नहीं हुए। एक सदस्य प्रो. रजनी त्रिपाठी ने ही अध्यक्ष
प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा पर ही भर्ती में अनियमितता करने का गंभीर आरोप
लगाकर चयन में ‘खेल’ को सतह पर ला दिया है।
प्रो. रजनी की ओर से शिकायती पत्र अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा को भेजे जाने
के बाद से ही यूपीएचईएससी में रार मची है। जबकि परीक्षा का परिणाम अगस्त
में ही जारी होने का हवाला देकर अनियमितता और विवाद पर पर्दा डालने की
भरपूर कोशिशें जारी हैं।
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