बिहार के तीन लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों को नियमित
शिक्षकों के समान वेतन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला
सुरक्षित रख लिया है। पिछले महीने हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार
सरकार से पूछा था कि वेतन में असमानता कब दूर होगी।
जस्टिस एएम सप्रे और
यूयू ललित की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके
वेणुगोपाल ने बहस की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अतिरिक्त आर्थिक
सहायता नहीं दी जा सकती क्योंकि ऐसा करने से अन्य राज्यों से भी यही मांग
उठेगी।
इस पर पीठ अटॉर्नी जरनल से कुछ सवाल किए और पूछा देश के और
किन राज्यों में शिक्षकों को कम वेतन देने की समस्या है। क्या शिक्षकों को
वेतन देने को लेकर आर्थिक सहायता की मांग किसी और अन्य राज्य से भी आई है।
क्या इस मुद्दे पर कभी किसी राज्य के साथ उनकी कोई बात हुई है। यदि ऐसी
मांगें आई हैं तो उन पर सरकार ने क्या किया है।
पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि वह शिक्षकों को वेतन विसंगति
कितने समय में दूर कर देगा। वहीं सरकार सर्वशिक्षा अभियान और शिक्षा के
अधिकार कानून की जरूरतें पूरी करने के लिए शिक्षकों की कमी के बारे में
उसकी क्या योजना है।
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