प्रयागराज : एक ओर जहां सरकार ई-गवर्नेस और सभी शासकीय कार्यो को ऑनलाइन
करने के लिए बढ़ावा दे रही है वहीं, उच्च प्रशासनिक सेवाओं में
अभ्यर्थियों के चयन के लिए प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था उप्र
लोकसेवा आयोग यानि यूपीपीएससी इस दिशा में कदम बढ़ाने से हिचक रही है। इसी
वजह से कई परिणाम लटके भी हैं जिनका खामियाजा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ता
है।
परीक्षाएं ऑनलाइन कराने के संबंध में मुख्य सचिव भी निर्देश दे चुके हैं।
करीब सवा साल पहले कुछ छोटी परीक्षाओं को ही ऑनलाइन कराने की ओर कदम बढ़ाने
के निर्देश दिए गए थे, जबकि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की ओर से प्रश्न
पत्र लीक होने की बढ़ती घटनाओं का तर्क देकर यूपीपीएससी परीक्षाएं ऑफलाइन
ही कराने पर टिका है। यूपीपीएससी की ओर से परीक्षाएं कराने के बाद परिणाम
जारी करने में महीनों लग जाते हैं। अब तो लंबे समय से तमाम परिणाम लटके हैं
जिनके इंतजार में अभ्यर्थियों की आंखें पथरा गई हैं और उनके सपने चूर हो
रहे हैं। 1लखनऊ में 21 जुलाई 2017 को तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में
हुई बैठक में यूपीपीएससी से कई परीक्षाओं की प्रक्रिया पर चर्चा की गई थी।
जिसमें यूपीपीएससी को इस संबंध में विचार करने के लिए कहा गया था कि
किन-किन परीक्षाओं को ऑनलाइन कराया जा सकता है, जिससे कि परिणाम शीघ्र
घोषित हो सके। दो महीने में यह कार्यवाही पूरी करने का निर्देश भी बैठक में
दिया गया था। मुख्य सचिव का यह निर्देश अब तक पूरा नहीं हो सका है और बड़ी
से लेकर छोटी परीक्षाएं तक ऑफलाइन ही कराई जा रही हैं। जिससे रिजल्ट भी
रुके हैं।1यूपीपीएससी के सचिव जगदीश का कहना है कि परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं
कराई जा सकती। संवेदनशीलता और शुचिता को बनाए रखने के लिए ऑफलाइन परीक्षाएं
ही कराई जा रही हैं। कहा कि कई भर्ती आयोग ऑनलाइन परीक्षा कराने वाले
एजेंसियों से परीक्षाएं करा रहे हैं जिनमें प्रश्न पत्र लीक होने की घटनाएं
भी बढ़ी हैं। यूपीपीएससी में संसाधन भी कम हैं ऐसे में किसी प्रकार का
खतरा मोल नहीं ले सकते।
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