लखनऊ : नई पेंशन योजना में बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम तो भविष्य में
सामने आएगा, जबकि वर्तमान का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इस पेंशन ने एक
झटके में प्रदेश के लाखों कर्मचारियों व शिक्षकों को मिलने वाला कुल वेतन
10.16 फीसद कम कर दिया है।
सोमवार को सामने आई नई पेंशन योजना के इस नए
तथ्य ने अप्रैल, 2005 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के साथ हड़ताल की
तैयारी कर रहे आंदोलनकारी नेताओं को भी में डाल दिया है।1नई पेंशन योजना को
लेकर कर्मचारियों व शिक्षकों का विरोध यूं ही नहीं है। इस प्रणाली में
जहां भविष्य में उन्हें मिलने वाली पेंशन अनिश्चित है, वहीं वर्तमान कुल
वेतन भी 10.16 फीसद कम हो गया है। कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी पुरानी पेंशन
बहाली मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि पुरानी पेंशन योजना में
कर्मचारियों के वेतन में 18.33 फीसद की कटौती कर इसे पेंशन खाते में भेजा
जाता था और कर्मचारियों के हाथ में 81.67 फीसद रकम आती थी। इसी में से
जीपीएफ व अन्य मदों की कटौती होती थी। 1कर्मचारी इसी 81.67 फीसद को अपना
पूरा वेतन मानते थे, जबकि 18.33 फीसद की कटौती का लाभ उन्हें सेवानिवृत्ति
के बाद पेंशन के तौर पर मिलता था। अप्रैल, 2005 में नई पेंशन योजना आई तो
एक झटके में 18.33 फीसद की यह रकम गायब हो गई। अप्रैल, 2005 से सेवा में आए
लोगों को भी 81.67 फीसद के रूप में उतना ही वेतन मिला, जितना समान पद पर
मार्च, 2005 या उससे भर्ती हुए लोगों को मिलता था लेकिन, इन कर्मचारियों के
लिए 18.33 फीसद की पेंशन कटौती बंद हो गई।नई पेंशन योजना में शामिल
कर्मचारियों के साथ पहला छलावा यह हुआ कि 10 फीसद कर्मचारी अंशदान के तौर
पर सरकार ने 81.67 फीसद रकम में से ही कटौती शुरू कर दी। इससे नई पेंशन
योजना में शामिल कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन करीब 8.17 फीसद कम
होकर 73.5 फीसद रह गया, जबकि पुरानी पेंशन योजना के कार्मिकों को 81.67
फीसद वेतन मिलता रहा। दूसरा छलावा यह हुआ कि सरकार ने 8.17 फीसद के
कर्मचारी अंशदान के साथ अपनी तरफ से भी इतना ही यानि 8.17 फीसद जमा करने का
दावा किया, जबकि दोनों अंशदान जोड़कर हुए 16.34 को कर्मचारियों के हाथ में
आने वाले 73.5 फीसद वेतन में जोड़ने के बाद भी कुल रकम 89.84 फीसद तक ही
पहुंची। यानि सरकार जिसे अपना अंशदान बता रही है, वह वास्तव में
कर्मचारियों की जेब से ही जा रहा है, जबकि 10.16 फीसद वेतन सीधे तौर पर कम
हो गया।
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