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TGT-PGT: टीजीटी और पीजीटी 2016 जल्द होने के आसार नहीं, शासन को भेजा गया नया प्रस्ताव

अशासकीय कालेजों की स्नातक शिक्षक व प्रवक्ता परीक्षा यानी टीजीटी-पीजीटी 2016 की लिखित परीक्षा जल्द होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। बदले घटनाक्रम में यूपी बोर्ड द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर यदि शासन की मुहर लग भी जाती है, तो भी तमाम अहम परीक्षाओं के कार्यक्रमों के पूर्व निर्धारित होने के चलते टीजीटी-पीजीटी परीक्षा यूपी बोर्ड की प्रायोगिक व लिखित परीक्षाओं के बाद ही होने की संभावना दिखती है।
1गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र अशासकीय कालेजों के लिए भर्तियां तेजी से कराने की जगह पहले से घोषित भर्तियों में रोड़े अटका रहा है। 2016 की प्रवक्ता व स्नातक शिक्षक भर्ती के करीब नौ हजार से अधिक पदों की लिखित परीक्षा अब तक नहीं हो सकी है। पूर्व में ये परीक्षा अक्टूबर 2016 में ही कराने का कार्यक्रम जारी हुआ था, जिसे बाद में टालना पड़ा। इसके बाद चयन बोर्ड का पुनर्गठन हुआ और प्रतियोगियों के आंदोलन को देखते हुए सितंबर 2018 में परीक्षा कराने का कार्यक्रम जारी किया गया। चयन बोर्ड की वेबसाइट पर अभी भी सितंबर माह की परीक्षा में परीक्षा की तारीखें दर्ज हैं। लेकिन इस इम्तिहान के पहले ही बोर्ड ने 12 जुलाई को निर्णय लेकर आठ विषयों का विज्ञापन इस आधार पर निरस्त कर दिया कि यह विषय ही कालेजों में नहीं हैं। इसी के साथ सितंबर माह की प्रस्तावित परीक्षा भी टाल दी गई। निरस्त हुए विषयों के आवेदन पर दो माह बाद भी असमंजस बरकरार है। बोर्ड के अधिकारियों का यह भी कहना है कि यदि ये प्रकरण कोर्ट तक पहुंचा तो अभ्यर्थियों को राहत मिलना तय है। शासन इस पर जल्द निर्देश देगा। लेकिन इस सारी कवायद के बावजूद टीजीटी-पीजीटी 2016 परीक्षा निकट भविष्य में हो पाने के आसार नहीं है।


  • दो बार तारीखें घोषित होने के बाद भी दो वर्ष से अधर में लटकी
  • शासन के निर्देश पर यूपी बोर्ड परीक्षाओं के बाद हो सकती परीक्षा

शासन को भेजा गया है नया प्रस्ताव1यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने शासन को नया प्रस्ताव भेजा है। जिसमें कहा गया है कि टीजीटी-पीजीटी 2016 में विज्ञापन के अनुसार तय पदों पर ही परीक्षा कराई जाए, क्योंकि आवेदकों की संख्या अधिक है और वे किसी दूसरे विषय के लिए अर्ह नहीं है। बोर्ड ने यह भी तर्क दिया है कि भले ही विषय काफी पहले खत्म हो चुका है। लेकिन, कालेजों में पद निरंतर बने हैं और उन विषयों का अंश अभी पाठ्यक्रम में भी है। इसलिए पुराने विज्ञापन से चयन कराने में कोई समस्या नहीं है।

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