जैसा कि लोक सभा चुनाव की आचारसंहिता मार्च के प्रथम सप्ताह में कभी भी लग सकती हैं, उक्त को लेकर यूपी का पौने दो लाख पीड़ित शिक्षामित्रों का परिवार अपना भविष्य असुरक्षित समझ करके ससंकित हैं, जैसा कि अभी तक डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा जी की अध्यक्षता में निर्मित हाई पावर कमेटी का फैसला
सार्वजनिक नहीं हो सका है, सभी पीड़ित शिक्षामित्रों को दिनांक - 3 मार्च तक मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी के द्वारा शिक्षामित्रों के भविष्य को लेकर कोई न कोई घोषणा होने की अपेक्षाएं की है, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक किसी भी प्रकार की हलचल सार्वजनिक न होने के कारण, शिक्षामित्रों को भय सता रहा है कि कही हमारे साथ योगी सरकार धोखा न कर दे!

बहरहाल फरवरी माह समाप्ति को ओर हैं, फरवरी माह के समापन के पश्चात मार्च लगते ही कभी भी भारत निर्वाचन आयोग लोक सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है, तिथि का ऐलान होते ही आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी, उक्त परिस्थिति में न तो भारत सरकार व राज्य सरकार कोई भी नया फैसला लेने में असमर्थ हो जाएगी, शिक्षामित्रों के शीर्ष नेताओं की कार्य प्रणाली अत्यंत शिथिल हो चुकी है, जिस कारण से योगी सरकार पर प्रभावी दबाव न पड़ने से सरकार केवल आश्वासन दे करके आचार संहिता लगने की सरकार प्रतीक्षा करती दिख रही हैं.
सार्वजनिक नहीं हो सका है, सभी पीड़ित शिक्षामित्रों को दिनांक - 3 मार्च तक मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी के द्वारा शिक्षामित्रों के भविष्य को लेकर कोई न कोई घोषणा होने की अपेक्षाएं की है, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक किसी भी प्रकार की हलचल सार्वजनिक न होने के कारण, शिक्षामित्रों को भय सता रहा है कि कही हमारे साथ योगी सरकार धोखा न कर दे!

बहरहाल फरवरी माह समाप्ति को ओर हैं, फरवरी माह के समापन के पश्चात मार्च लगते ही कभी भी भारत निर्वाचन आयोग लोक सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है, तिथि का ऐलान होते ही आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी, उक्त परिस्थिति में न तो भारत सरकार व राज्य सरकार कोई भी नया फैसला लेने में असमर्थ हो जाएगी, शिक्षामित्रों के शीर्ष नेताओं की कार्य प्रणाली अत्यंत शिथिल हो चुकी है, जिस कारण से योगी सरकार पर प्रभावी दबाव न पड़ने से सरकार केवल आश्वासन दे करके आचार संहिता लगने की सरकार प्रतीक्षा करती दिख रही हैं.
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