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फर्जी शिक्षक भर्ती: एसआईटी जांच के बाद 34 शिक्षकों पर गिरी गाज

मथुरा। फर्जी शिक्षक घोटाले में एसआईटी कमेटी गठन होने के बाद लगातार जिले में फर्जी शिक्षकों पर कमेटी की नजर बनी हुई है। एसआईटी की जांच में बीएड सत्र 2004-5 में फर्जी डिग्री लेकर बेसिक शिक्षा में शिक्षक की नौकरी पाने वाले 34 शिक्षकों पर कार्यवाही हुई और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
फर्जी शिक्षकों पर हुई इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है। वहीं प्रकरण की जांच कर रही प्रदेश स्तरीय कमेटी ने सूची में जनपद के 59 शिक्षकों के नाम सामने आए थे जिन्हें सितंबर में निलंबित कर दिया गया था। शेष बचे हुए 26 शिक्षकों के नाम टेंपल अंकपत्र में होने की वजह से उनकी जांच विभाग स्तर पर कराई गई थी। विभागीय स्तर पर हुई जांच में 34 शिक्षक फर्जी पाए गए जिन पर कार्रवाई की गई है।
ये था मामला
एसआईटी की सूची में मथुरा जनपद से कुल 58 शिक्षक सूची में शामिल थे। इस मामले में अन्य शिक्षकों के खिलाफ जांच जारी है। मथुरा में हुई इस कार्रवाई से शिक्षकों में खलबली मची हुई है। हाईकोर्ट के आदेश पर डॉ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में B.Ed की डिग्री 2004-5 ले चुके शिक्षकों की जांच का जिम्मा एसआईटी को दिया गया था लंबे समय के बाद एसआईटी ने गत वर्ष करीब 4700 शिक्षकों की सूची बेसिक शिक्षा परिषद को सौंपी थी जो कि फर्जी पाए गए थे और गलत तरीके से नंबर बड़वा कर पास हुए।

सूची के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद ने इस वर्ष जनवरी माह में सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इन शिक्षकों की पहचान कर बर्खास्त करने के आदेश दिए। साथ में जितने समय का वेतन पा चुके है उतना वेतन रिकवरी के आदेश भी दिए गए थे। जिले में 9 माह तक इन शिक्षकों के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकी थी लेकिन शासन के दबाव पड़ने पर लगातार सूचनाएं मांगी जा रही थीं। सितंबर माह में शासन के द्वारा करी 59 ऐसे शिक्षकों को निलंबित किया गया था जो फर्जी डिग्री लेकर नौकरी आए हुए थे वहीं 26 नवंबर को सूचना के आधार पर इन शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया और 3 माह बाद शामिल फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने के आदेश दिए गए। बीएसए आदेश के बाद जनपद के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। बता दें कि यह फर्जी शिक्षक विभाग से करीब आठ माह का करोड़ों रुपए वेतन के रूप में ले चुके हैं।

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