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नियुक्ति की मांग लेकर लंबे समय से लड़ाई कर रहे यूपी के करीब 50 हजार शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं यूपी के प्राइमरी स्कूल

नियुक्ति की मांग लेकर लंबे समय से लड़ाई कर रहे यूपी के करीब 50 हजार शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं यूपी के प्राइमरी स्कूल
लखनऊ. नियुक्ति की मांग लेकर लंबे समय से लड़ाई कर रहे यूपी के करीब 50 हजार शिक्षामित्रों के भरोसे यूपी के यूपी के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है. दरअसल शहर के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से पास के स्कूलों के शिक्षकों पर प्रेशर बढ़ गया है. राजधानी लखनऊ नगर क्षेत्र के कई ऐसे स्कूल हैं जहां प्रधान अध्यापक और सहायक अध्यापक न होने से पास के प्राइमरी स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षकों को इंचार्ज की ड्यूटी थमा दी गई हैं. वो एक स्कूल में पढ़ा रहे हैं दूसरे में इंचार्ज की ड्यूटी भी निभा रहे हैं. जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं है वहां पूरे स्कूल की पढ़ाई शिक्षामित्रों के भरोसे चल रही है.

न्यूज 18 की जांच पड़ताल के दौरान लखनऊ के प्राथमिक विद्यालय में तैनात टीचर स्वेटर बंटवाने आई हैं. इस स्कूल में 242 बच्चे हैं. इनमें से 118 लड़के और 124 लड़कियां हैं. एक भी सहायक अध्यापक नहीं हैं. न ही प्रधानाध्यापक हैं. दो शिक्षामित्र हैं. अप्रैल में यहां तैनात शिक्षिका के रिटायर होने के बाद पास के कमता प्राथमिक विद्यालय से एक शिक्षिका को इस स्कूल में नियुक्त किया गया था. जिन्हें दो महीने पहले अपने मूल स्कूल में भेजा जा चुका हैं. उनके पास कमता दो प्राथमिक विद्यालय का भी चार्ज है. वहीं शिक्षामित्रों के ऊपर बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है. जितना भी वित्तीय काम होता है इंचार्ज करती हैं. स्कूल में बीटीसी के 10 छात्र ट्रेनिंग पर आए हैं जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं.

एक कमरे में काम देकर दूसरे में पढ़ाने जाती हैं शिक्षिका
242 बच्चों को दो ही शिक्षामित्र पढ़ा रहे हैं. शिक्षामित्र एक कक्षा में बच्चों को काम देकर दूसरी कक्षा में पढ़ाने जाते हैं. शिक्षामित्र सभी पांचों कक्षाओं को ऐसे ही मैनेज कर रहे हैं.
एक टीचर पर तकरीबन 400 बच्चों का जिम्मा

दूसरी तस्वीर प्राथमिक विद्यालय मटियारी की हैं, जहां 249 बच्चे पढ़ते हैं. इनमें 139 लड़के और 110 लड़कियां हैं. स्कूल केवल तीन शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहा है. यह शिक्षामित्र साल 2015 से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. स्कूल परिसर में ही पूर्व माध्यमिक स्कूल भी चल रहा है. वहां की प्रधानाध्यापिका को प्राइमरी स्कूल का इंचार्ज बनाया गया है. स्कूल के एसएमसी के अध्यक्ष विकास विश्वकर्मा ने बताया कि स्कूल में शिक्षक नहीं है. यूपीएस की प्रधानाध्यापिका को पीएस का इंचार्ज बना दिया है. वह एक साथ दो स्कूलों की जिम्मेदारी निभा रही हैं. एक शिक्षिका तकरीबन 400 बच्चों को देख रही हैं.

शिक्षकों की कमी- बीएसएराजधानी लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अमरकांत बताते हैं कि शिक्षकों की कमी के कारण मौजूदा हालात ऐसे है. उन्होंने बताया कि जल्द शिक्षक भर्ती अगर पूर्ण होती है तो नौनिहालों को शिक्षक मिल जाएंगे.
स्कूल का नाम/ बच्चों की संख्या
अमीनाबाद: 36
आजादनगर: 49
बाजार झाऊलाल: 72
बेहसा: 147
बेहसा- 2: 112
चकरपुरवा: 15
गंगादीन खेड़ा: 33
करेहटा: 150
रकाबगंज: 93
मारवाड़ी गली: 45
न्यू ऐशबाग: 132
नेपियार रोड 222
रानीगंज: 25
शंकरपुरवा: 187
उदयगंज: 97
लामाटिनियर पुरवा: 33
लोकमानगंज: 47
मदेगंज: 130
न्यू गुदौरा: 34
नीलमथा: 79
गौरी- 1: 90
गोरी- 2: 57
गुदौरा: 26
मवैया: 106
हैदरगंज: 145
हसनपुरिया: 60

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