प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 69000
शिक्षक भर्ती में चयनित ओबीसी वर्ग की अभ्यर्थी को राहत दी है। कोर्ट ने
उन्हें अनुक्रमांक की त्रुटि सुधारने की छूट दी है। कहा कि याची काउंसिलिंग
के समय कमेटी के समक्ष अपना प्रत्यावेदन दे और कमेटी उस पर सहानुभूति
पूर्वक विचार कर उचित निर्णय लें। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने
झांसी की पिंकी की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि वह सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में सफल हुई है। उसे 150 में से 108 अंक मिले हैं, लेकिन ऑनलाइन आवेदन भरते समय उसने अपना स्नातक का रोल नंबर गलत भर दिया। ऐसा मानवीय त्रुटि की वजह से हुआ है। गलत रोल नंबर भरने का कोई उद्देश्य नहीं था। भूलवश ऐसा हो गया है, जिसे सुधारने की अनुमति दी जाय। इस पर कोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति 1981 की नियमावली के तहत हो रही है जिसमें काउंसिलिंग के लिए कमेटी गठित की जाती है। याची काउंसिलिंग के दौरान संबंधित कमेटी को अपना प्रत्यावेदन दे सकती है।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने आशुतोष कुमार श्रीवास्तव और 60 अन्य की याचिकाएं मानवीय त्रुटि के आधार पर राहत देने से इनकार करते हुए खारिज कर दी थी, क्योंकि उसमें कुछ अभ्यर्थियों द्वारा की गई त्रुटियां मानवीय भूल नहीं पाई गई थी। उन्होंने बीएड के अंकों की गलती सुधारने की मांग की गयी थी। कोर्ट ने पाया था कि इसकी आड़ में अनुचित लाभ लिया जा सकता है।
याची का कहना था कि वह सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में सफल हुई है। उसे 150 में से 108 अंक मिले हैं, लेकिन ऑनलाइन आवेदन भरते समय उसने अपना स्नातक का रोल नंबर गलत भर दिया। ऐसा मानवीय त्रुटि की वजह से हुआ है। गलत रोल नंबर भरने का कोई उद्देश्य नहीं था। भूलवश ऐसा हो गया है, जिसे सुधारने की अनुमति दी जाय। इस पर कोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति 1981 की नियमावली के तहत हो रही है जिसमें काउंसिलिंग के लिए कमेटी गठित की जाती है। याची काउंसिलिंग के दौरान संबंधित कमेटी को अपना प्रत्यावेदन दे सकती है।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने आशुतोष कुमार श्रीवास्तव और 60 अन्य की याचिकाएं मानवीय त्रुटि के आधार पर राहत देने से इनकार करते हुए खारिज कर दी थी, क्योंकि उसमें कुछ अभ्यर्थियों द्वारा की गई त्रुटियां मानवीय भूल नहीं पाई गई थी। उन्होंने बीएड के अंकों की गलती सुधारने की मांग की गयी थी। कोर्ट ने पाया था कि इसकी आड़ में अनुचित लाभ लिया जा सकता है।
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