कोरोना संक्रमण के कारण उपजे माहौल में अभी स्कूलों को खुलने में वक्त लगेगा। तैयारी यह भी है कि स्कूल खुलने के बाद आने या न आने को लेकर छात्रों और अभिभावकों को छूट दी जाए। एक विचार यह है कि सिर्फ
ऐसे बच्चों को ही स्कूल बुलाया जाए, जो संसाधनों के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, यानी उनके पास मोबाइल, इंटरनेट और टीवी आदि नहीं है। जो छात्र घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं, उन्हें
ऑनलाइन ही पढ़ाया जाए। उन्हें स्कूल आने की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। मानव संसाधन विकास मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इससे शारीरिक दूरी के प्रावधानों का आसानी से पालन कराया जा सकेगा।
अभिभावकों ने संक्रमण का खतरा टलने तक मंत्रलय को ऑनलाइन पढ़ाई कराने का ही सुझाव दिया है। फिलहाल इन सारी परिस्थितियों के बीच मंत्रलय स्कूलों को खोलने की तैयारी में जुटा हुआ है। राज्यों के साथ स्कूलों को खोलने और ऑनलाइन शिक्षा को लेकर सोमवार को हुई बैठक में ज्यादातर राज्य सभी छात्रों को नहीं बुलाने की योजना के पक्ष में दिखे। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इस योजना को शहरी क्षेत्रों में पहले अपनाया जा सकता है, जहां ज्यादातर छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के संसाधन मौजूद हैं। हाल ही में केंद्रीय विद्यालय जैसे स्कूल संगठन ने एक टेस्ट के जरिये अब तक कराई गई ऑनलाइन पढ़ाई का आकलन भी शुरू किया है।
ऐसे बच्चों को ही स्कूल बुलाया जाए, जो संसाधनों के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, यानी उनके पास मोबाइल, इंटरनेट और टीवी आदि नहीं है। जो छात्र घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं, उन्हें

अभिभावकों ने संक्रमण का खतरा टलने तक मंत्रलय को ऑनलाइन पढ़ाई कराने का ही सुझाव दिया है। फिलहाल इन सारी परिस्थितियों के बीच मंत्रलय स्कूलों को खोलने की तैयारी में जुटा हुआ है। राज्यों के साथ स्कूलों को खोलने और ऑनलाइन शिक्षा को लेकर सोमवार को हुई बैठक में ज्यादातर राज्य सभी छात्रों को नहीं बुलाने की योजना के पक्ष में दिखे। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इस योजना को शहरी क्षेत्रों में पहले अपनाया जा सकता है, जहां ज्यादातर छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के संसाधन मौजूद हैं। हाल ही में केंद्रीय विद्यालय जैसे स्कूल संगठन ने एक टेस्ट के जरिये अब तक कराई गई ऑनलाइन पढ़ाई का आकलन भी शुरू किया है।
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