प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड की ओर से हाईस्कूल के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 501 और इंटरमीडिएट के लिए 601 रुपये रखा गया है। इस शुल्क में स्कूल के प्रधानाचार्यों को फार्म भरने के लिए मात्र 25 पैसे (चवन्नी) दिया जा रहा है।
स्कूलों को इसी 25 पैसे में बच्चों का ऑनलाइन फार्म भरवाना होगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि ऑनलाइन फार्म भरने के लिए साइबर कैफे अथवा ऑनलाइन काम करने वाली किसी एजेंसी की सेवा लेनी होगी, इसके लिए कम से कम प्रति फार्म दो रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में प्रधानाचार्यों ने सवाल उठाया है कि 25 पैसे में कैसे फार्म भरा जाएगा।
प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश कुमार शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्यों की ओर से हर साल आवेदन शुल्क में स्कूल का खर्च बढ़ाने की मांग की जाती है, सरकार और बोर्ड की ओर से आश्वासन भी मिलता है परंतु होता कुछ नहीं है। एक बार फिर से यूपी बोर्ड के परीक्षा शुल्क में स्कूलों को फिर से चवन्नी ही मिली है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रवक्ता एसपी तिवारी का कहना है कि यह कितना अव्यवहारिक है कि बोर्ड जब ऑफलाइन आवेदन होता था, उसी समय का आवेदन खर्च हमें दे रहा है जबकि फीस 200 से 500 रुपये तक पहुंच गई।
बोर्ड की ओर से माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश लेने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त रखी गई है। कोरोना संकट के काल में प्रधानाचार्यों ने पांच अगस्त तक शुल्क जमा करने और प्रवेश पूरा होने को अव्यवहारिक बताया है।
बच्चे स्कूल आ नही रहे हैं, उनके लिए स्कूल 31 जुलाई तक बंद हैं। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करना और प्रवेश लेना मुश्किल होगा। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क नहीं जमा करने पर छात्रों, अभिभावकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा।
स्कूलों को इसी 25 पैसे में बच्चों का ऑनलाइन फार्म भरवाना होगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि ऑनलाइन फार्म भरने के लिए साइबर कैफे अथवा ऑनलाइन काम करने वाली किसी एजेंसी की सेवा लेनी होगी, इसके लिए कम से कम प्रति फार्म दो रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में प्रधानाचार्यों ने सवाल उठाया है कि 25 पैसे में कैसे फार्म भरा जाएगा।
प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश कुमार शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्यों की ओर से हर साल आवेदन शुल्क में स्कूल का खर्च बढ़ाने की मांग की जाती है, सरकार और बोर्ड की ओर से आश्वासन भी मिलता है परंतु होता कुछ नहीं है। एक बार फिर से यूपी बोर्ड के परीक्षा शुल्क में स्कूलों को फिर से चवन्नी ही मिली है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रवक्ता एसपी तिवारी का कहना है कि यह कितना अव्यवहारिक है कि बोर्ड जब ऑफलाइन आवेदन होता था, उसी समय का आवेदन खर्च हमें दे रहा है जबकि फीस 200 से 500 रुपये तक पहुंच गई।
बोर्ड की ओर से माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश लेने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त रखी गई है। कोरोना संकट के काल में प्रधानाचार्यों ने पांच अगस्त तक शुल्क जमा करने और प्रवेश पूरा होने को अव्यवहारिक बताया है।
बच्चे स्कूल आ नही रहे हैं, उनके लिए स्कूल 31 जुलाई तक बंद हैं। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करना और प्रवेश लेना मुश्किल होगा। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क नहीं जमा करने पर छात्रों, अभिभावकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा।

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