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बेसिक के 61 फर्जी शिक्षकों से नहीं हुई वेतन रिकवरी:- तीन साल पहले किए गए थे बर्खास्त

फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक बनने का खेल सालों से चला आ रहा है। अभी 69 हजार शिक्षक भर्ती का प्रकरण शांत भी नहीं हुआ कि एक और मामला सामने आ गया है। यह 61 ऐसे फर्जी शिक्षकों का मामला है, जो तीन साल पहले बर्खास्त हो चुके हैं। लेकिन विभाग अब तक इन लोगों से नौकरी के दौरान वेतन के रूप में लिए गए करोड़ों रुपये की वसूली नहीं कर पाया है।



तीन साल पहले धनूपुर ब्लाक में सात, बहरिया में सात, करछना में दो, कौड़िहार में आठ, कोरांव में चार, मऊआईमा में एक, मांडा में चार, मेजा में सात, हंडिया में दो, प्रतापपुर में तीन, सैदाबाद में आठ, उरुवा में चार, फूलपुर व जसरा में दो-दो शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करते पाए थे। तब इन 61 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन तब तक यह लोग तीन से दस साल की नौकरी कर चुके थे। जब बर्खास्त हुए तो इन सभी से वेतन की रिकवरी होनी थी। लेकिन विभाग की लापरवाही से रिकवरी नहीं हुई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब शिक्षकों के फर्जीवाड़े के प्रकरण प्रदेश भर में चल रहा है तो पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में बर्खास्त शिक्षकों का भी मामला सामने आया। बर्खास्त शिक्षकों पर कार्रवाई न होने की जानकारी मिलने पर अफसरों ने नाराजगी जताई। उसके बाद बीएसए सक्रिय हुए और बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा कराने के साथ ही रिकवरी कराने का आदेश दिया। अब उनके खिलाफ मुकदमें कराए जा रहे हैं।

सभी बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक जुलाई को पत्र जारी कर संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित किया गया था। उसके बाद वित्त अधिकारी को भी इस संबंध में लिखकर जानकारी मांगी गई। अब सभी बर्खास्त शिक्षकों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें एक सप्ताह का समय भी दिया है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

संजय कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी

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