नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने पेच फंसा दिया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर आश्क्षण नियमों का पालन न करने के मामले में आयोग ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विशेष सचिव और परीक्षा नियामक प्राधिकार के सचिव को सात जुलाई को तलब किया है।
आयोग उपाध्यक्ष डॉ. लोकेश कुमार प्रजापति इस मामले की सुनवाई करेंगे। शिक्षक भर्ती में आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भाजपा और एनडीए की सहयोगी अपना दल (एस ) ने मोर्चा खोल दिया था। एटा सांसद राजबीर सिंह, सीतापुर सदर विधायक राकेश राठौर और अपना दल (एस) के पूर्व अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल ने पिछले दिनों सीएम को लिखे अलग-अलग पत्र में आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। इनका कहना था कि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों का कटऑफ सामान्य से ज्यादा है, उसे भी सामान्य श्रेणी कोटे में जगह नहीं दी गई। इस कारण पिछड़ा वर्ग के 15,000 अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा है। जबकि यूपी शासनादेश में साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य श्रेणी के समानांतर या उससे अधिक अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन सामान्य कोटे में किया जाएगा। इसके बाद कई संगठनों ने मामले को आयोग के समक्ष उठाया था। आयोग ने नोटिस जारी कर कहा है कि अनुच्छेद 338-बी के तहत उसे इस मामले में हस्तक्षेप का सांविधानिक अधिकार है।
आयोग उपाध्यक्ष डॉ. लोकेश कुमार प्रजापति इस मामले की सुनवाई करेंगे। शिक्षक भर्ती में आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भाजपा और एनडीए की सहयोगी अपना दल (एस ) ने मोर्चा खोल दिया था। एटा सांसद राजबीर सिंह, सीतापुर सदर विधायक राकेश राठौर और अपना दल (एस) के पूर्व अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल ने पिछले दिनों सीएम को लिखे अलग-अलग पत्र में आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। इनका कहना था कि आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों का कटऑफ सामान्य से ज्यादा है, उसे भी सामान्य श्रेणी कोटे में जगह नहीं दी गई। इस कारण पिछड़ा वर्ग के 15,000 अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा है। जबकि यूपी शासनादेश में साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य श्रेणी के समानांतर या उससे अधिक अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन सामान्य कोटे में किया जाएगा। इसके बाद कई संगठनों ने मामले को आयोग के समक्ष उठाया था। आयोग ने नोटिस जारी कर कहा है कि अनुच्छेद 338-बी के तहत उसे इस मामले में हस्तक्षेप का सांविधानिक अधिकार है।

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