बेसिक शिक्षा विभाग में जब-जब शिक्षकों की नियुक्ति हुईं, तो शिक्षकों को मनपसंद स्कूल देने के नाम पर जमकर चढ़ावा लिया गया। अंदरखाने खेल यहां तक हुआ कि जितनी मोटी फाइल तैयार, घर से उतना ही करीब स्कूल मिल गया। हालांकि अब शिक्षकों की नियुक्ति में ऐसा कुछ नहीं हो पाएगा।
69000 शिक्षक भर्ती मामले में नियुक्ति से पहले ही शासन ने बीएसए से सभी अधिकार छीन लिए हैं। न ही वह कुछ कर पाएंगे, और न उनके कार्यालय के कर्मी। इस भर्ती में जो शिक्षक नियुक्त होंगे, उन्हें निदेशालय से जो नियुक्ति पत्र मिलेगा उसमें केवल जनपद अंकित होगा। स्कूल कौन सा होगा, किस विकासखंडका होगा, यह फैसला अब शासन स्तर से होगा। इसके लिए यू-डायस का डाटा व मानव संपदा पोर्टल पर मौजूदा डाटा की मदद ली जाएगी। ऐसा पहली बार होगा, जब शिक्षकों को स्कूल का विकल्प शासन द्वारा
लाखों रुपये में तय होते स्कूल: शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों को मनपसंद स्कूल देने के एवज में रुपये भी लिए जाते रहे। नई व्यवस्था से यह खेल खत्म हो जाएगा।

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