प्रदेश के साढ़े चार हजार से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में 15508 शिक्षकों की भर्ती 100 साल पुराने नियम से होगी। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड शिक्षकों की भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट
शिक्षा अधिनियम 1921 को मानता है। वैसे तो 100 साल पुराने एक्ट में समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं लेकिनयहीं नहीं योग्य शिक्षकों की भर्ती में भी अड़चन आ रही है। सबसे अधिक विवाद कला विषय के शिक्षकों की अर्हता को लेकर है। कला विषय में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (बीएफए) या मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (एमएफए) जैसी उच्च योग्यता को दरकिनार करते हुए इंटर स्तर के डिप्लोमा को प्राथमिकता दी गई है। वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित स्नातक विज्ञान की अर्हता को लेकर भी विवाद पैदा हो गया है। विज्ञान में भौतिक और रसायन विज्ञान के साथ बीएससी करने वालों से आवेदन मांगे गए हैं। जबकि जीव विज्ञान या वनस्पति विज्ञान से बीएससी करने वालों को बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर पहले से प्रतियोगी छात्र आंदोलित हैं।
लाहौर तक की डिग्री मान्य
प्रशिक्षित स्नातक कला के लिए राजकीय कला और शिल्प विद्यालय लखनऊ का आर्ट मास्टर्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (जो पहले ड्राइंग टीचर्स सर्टिफिकेट कहलाता था) या प्राविधिक कला के साथ यूपी बोर्ड से इंटर पास मान्य है। इसके अलावा प्राविधिक कला के साथ हाईस्कूल और ड्राइंग अथवा पेंटिंग के साथ बीए या कला भवन शांति निकेतन का फाइन आर्ट का डिप्लोमा या राजकीय ड्राइंग और हैंडीक्राफ्ट सेंटर प्रयागराज का सर्टिफिकेट, या कलकत्ता की फाइनल ड्राइंग टीचर्सशिप या लाहौर के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स की टीचर्स सीनियर सर्टिफिकेट परीक्षा या मुम्बई की इंटरमीडिएट ग्रेड ड्राइंग परीक्षा या मुम्बई की थर्ड ग्रेड आर्ट्स स्कूल परीक्षा मान्य है। प्रवक्ता पद की भर्ती में भी लाहौर का सर्टिफिकेट मान्य है। चयन बोर्ड ने कला विषय के अंतर्गत प्रशिक्षित स्नातक के 813 और प्रवक्ता 76 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।
इनका कहना है
सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में योग्य शिक्षकों का चयन करना माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की जिम्मेदारी है। कायदे-कानून भी अपडेट होना जरूरी है। अन्यथा बेवजह विवाद होने पर पूरी चयन प्रक्रिया बाधित होती है।
सुरेश कुमार त्रिपाठी, शिक्षक विधायक

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