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Govt Jobs : Opening

भंवर में शिक्षक भर्तियां, फंस गया चयन:- शासन का हलफनामा, बोर्ड मौन

 प्रयागराज : एडेड माध्यमिक कालेजों की टीजीटी-पीजीटी भर्ती 2020 शुरू करने के लिए भले ही शासन के निर्देशों का इंतजार हो, लेकिन वास्तविक तस्वीर इससे उलट है। जो भर्तियां वर्षो से लंबित हैं, उन्हें भी पूरा कराने में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उत्तर प्रदेश तत्पर नहीं है। हाईकोर्ट और नियमों की आड़ लेकर भर्तियों को लटकाया जा रहा है, जबकि प्रतियोगी परेशान हैं।



चयन बोर्ड की वर्ष 2011 प्रधानाचार्य भर्ती लंबे समय तक हाईकोर्ट के आदेश से लटकी रही। 20 जून 2014 के शासनादेश से नौ मंडलों के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार कराकर परिणाम भी घोषित किया जा चुका है, लेकिन छह मंडलों का साक्षात्कार बीते वर्ष निरस्त कर दिया गया। इनमें गोरखपुर, मुरादाबाद, चित्रकूट, मेरठ, बस्ती व अयोध्या शामिल हैं। कहा गया कि इन मंडलों में साक्षात्कार के 21 दिन की नोटिस पूर्ण नहीं की गई थी। इसलिए इन मंडलों का परिणाम हाईकोर्ट के आदेश पर तैयार नहीं किया जा सकता। इन मंडलों का साक्षात्कार नए सिरे से कब शुरू होगा, तय नहीं है।

इसी तरह वर्ष 2013 प्रधानाचार्य पद पर चयन का इंटरव्यू अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसमें 642 पदों पर चयन होना है। यह हाल तब है, जब चयन बोर्ड के पुनर्गठन के बाद दावा किया गया था कि आवेदनों की स्क्रीनिंग की जा रही है, जिसके पूरा होते ही साक्षात्कार होगा। अभ्यर्थी उसकी राह देख रहे हैं। चयन बोर्ड अध्यक्ष बीरेश कुमार ने प्रतियोगियों से कहा था कि बोर्ड बैठक में इस संबंध में निर्णय होगा।

प्रधानाचार्य पदों का नया विज्ञापन नहीं

चयन बोर्ड टीजीटी-पीजीटी 2020 विज्ञापन के बाद प्रधानाचार्य पदों का नया विज्ञापन जारी करने की तैयारी में था, लेकिन संशोधित विज्ञापन अब तक जारी नहीं हो सका है, इसलिए प्रधानाचार्य 2020 का विज्ञापन भी फंसा है।

’>>2011 व 2013 प्रधानाचार्य भर्ती का साक्षात्कार वर्षो से लटका

’>>चयन बोर्ड ने नहीं कराई 2016 टीजीटी जीव विज्ञान की लिखित परीक्षा

शासन का हलफनामा, बोर्ड मौन

2016 की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी जीव विज्ञान विषय की लिखित परीक्षा अब तक नहीं हो सकी है, जबकि इस संबंध में शासन ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि जो विज्ञापित पद निरस्त होंगे, उनकी भर्ती कराई जाएगी। दरअसल चयन बोर्ड ने ही विज्ञापित पदों में से जीव विज्ञान के पद निरस्त किए थे। इसलिए शासन की पहल के बाद भी लिखित परीक्षा कराने की तारीख तय नहीं की जा रही है।

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