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भर्तियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुंडन कराके सत्ता का पिंडदान करेंगे प्रतियोगी छात्र, प्रतियोगी छात्रों की प्रमुख मांगें

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पारदर्शिता के नाम पर तमाम नियम बदल दिए और प्रतियोगी छात्रों को कोई जानकारी भी नहीं दी। अभ्यर्थी इन बदलावों से परेशान हैं। आयोग की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू हुए चार साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक एक गिरफ्तारी भी नहीं हुई। भर्तियों में भ्रष्टचार के मुद्दे पर प्रतियोगी छात्रों ने निर्णय लिया है कि 20 जनवरी को संगम तट पर मुंडन कराके सत्ता का पिंडदान करेंगे।



सपा के शासनकाल में हुई भर्तियों में भ्रष्टचार का आरोप लगाकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने प्रदेश व्यापी आंदोलन किया था। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने अपने वादे के अनुरूप यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू कराई। जांच को चार साल पूरे हो चुके हैं।


दो प्रमुख परीक्षाओं पीसीएस-2015 और एपीएस-2010 के मामले में सीबीआई एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है, लेकिन अब तक एक गिरफ्तारी भी नहीं हुई। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का आरोप है कि सीबीआई जांच के नाम पर छात्रों को गुमराह किया गया। अवनीश ने प्रदेश सरकार पर भी सीबीआई जांच में असहयोग करने के आरोप लगाए हैं।

अवनीश का कहना है कि ऐसे ही तमाम मुद्दों पर समिति के पदाधिकारी ने 20 जनवरी को गंगा तट पर अपना मुंडन कराके सत्ता का पिंडदान करेंगे और मांगें पूरी न होने पर सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग भी करेंगे।

समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि भर्तियों में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के कारण छात्र आए दिन आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में उनके सामने इच्छा मृत्यु एकमात्र विकल्प रह गया है। प्रतियोगी छात्र आशुतोष पांडेय, अनुपम, विवेक, दीपक, धीरज, आशु, शिवम, अंजनी, शिवम पांडेय, शुभम आदि ने भी अपना मुंडन कराने का निर्णय लिया है। 
पारदर्शिता के नाम पर बदल दिए कई नियम
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि आयोग ने पारदर्शिता के नाम पर कई नियम बदल दिए। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के अंक सार्वजनिक नहीं किए जा रहे। अंतिम चयन परिणाम जारी होने के महीनों बाद भी प्राप्तांक एवं कटऑफ के लिए अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं की अंतिम उत्तरकुंजी भी जारी नहीं की जा रही।

प्राप्तांक में स्केलिंग की जानकारी छिपाई जा रही है। समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत के अनुसार शासन ने आयोग को पत्र भेजकर निर्देश दिए थे कि अभ्यर्थियों की कॉपियां स्कैन कर वेबसाइट पर अपलोड की जाएं, लेकिन यह भी नहीं हुआ, बल्कि पारदर्शिता के नाम पर भर्तियों में भ्रष्टाचार बढ़ा है।
 
 
प्रतियोगी छात्रों की प्रमुख मांगें
  1. सीबीआई जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी का गठन हो
  2. ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को भी अन्य आरक्षित वर्गों के समान आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिले
  3. यूपीपीएससी पूर्व की भांति प्रारंभिक परीक्षा के अंक भी बताए 
  4. यूपीपीएससी परीक्षा परिणाम वाले दिन ही प्राप्तांक एवं कटऑफ जारी करे। साथ ही अंतिम उत्तरकुंजी जारी हो
  5. अभ्यर्थियों की कॉपियां स्कैन कर यूपीपीएससी की वेबसाइट पर अपलोड की जाएं
  6. भर्ती परीक्षाओं के कैलेंडर के साथ परीक्षाओं के पूर्ण होने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए
  7. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग 22 विभिन्न प्रकार की भर्तियों के तहत हजार 30 पदों पर भर्ती प्रक्रिया से पूरी करे
  8. यूपीपीएससी की जो भी भर्तियां अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को स्थानांतरित की गईं थी, उन्हें वापस यूपीपीएससी से कराने की अनुमति दी जाए
  9. माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में भ्रष्टाचार पर तत्काल रोक लगाई जाए और बोर्ड के अंदर बैठे नकल माफिया की जांच हो
  10. प्राथमिक शिक्षक भर्ती शीघ्र शुरू कराई जाए

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