एटा: वर्षों पहले नियम को ताक पर रखकर फर्जी तरीके से की गई शिक्षक की नियुक्ति विभागीय अधिकारियों के लिए ही गले की फांस बन गई है। मामले को लेकर पहले विभाग में सेवा से पृथक कर वेतन भुगतान रोक दिया और फिर पिछले साल वेतन भुगतान भी करा दिया। मामले की शिकायत पर लगातार विभाग से रिपोर्ट तथा पत्रावली मांगी गई, लेकिन महीनों बाद भी पत्रावली उपलब्ध न कराने पर अपर निदेशक बेसिक शिक्षा में बीएसए को पत्रावली उपलब्ध कराने के लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया है।
मामला चेतराम सिंह जूनियर हाईस्कूल जैनपुरा का है। यहां रविद्र पाल सिंह की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई थी। पिता के उपप्रबंधक रहते हुए नियुक्ति प्राप्त की तथा शैक्षिक योग्यता बाद में पूरी की। 2015 में शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें रिपोर्ट के आधार पर मई 2015 में शिक्षक का वेतन रोकने तथा अगस्त 2017 में तत्कालीन बीएसए ने सेवाओं से पृथक कर दिया। फर्जी नियुक्ति को लेकर फिर से 2021 में चार सदस्य जांच टीम गठित करते हुए मामले को पलटते हुए 25 सितंबर 2021 को शिक्षकों को वेतन का भुगतान करा दिया गया।
मामले में शिकायतकर्ता अंकित पचौरी ने फर्जी शिक्षक को सेवा से पृथक किए जाने के बावजूद वेतन भुगतान की शिकायत उच्चाधिकारियों से की। जनवरी 2022 में अपर निदेशक ने बीएसए एटा से प्रमाणित पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। तीन महीना गुजरने के बाद भी पत्रावली अपर निदेशक को उपलब्ध नहीं कराई है। इस तरह की लापरवाही पर फिर से अपर निदेशक डा. पूरन सिंह ने बीएसए एटा को 30 अप्रैल तक पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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