सरकारी अधिकारियों के बीच फैले हैं शिक्षा माफिया
लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा है कि एक सरकारी अधिकारी द्वारा अवैध तरीके से कमाए गए धन का पता लगाना और उसके खिलाफ कार्रवाई करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि शिक्षा माफिया सरकारी अधिकारियों के बीच ही हैं, उन पर लगाम लगाने की जरूरत है। न्यायालय ने आदेश की प्रति प्रमुख सचिव गृह को भेजने का आदेश देते हुए, उचित कार्रवाई का भी निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने अयोध्या मंडल के ज्वाइंट डायरेक्टर एजुकेशन अरविंद कुमार पांडेय के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। याची ने अपने खिलाफ पारित 15 अप्रैल 2023 के निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार के अधिवक्ता का तर्क था कि याची ने पहले तो प्रबंधकीय कालेजों के प्रबंधन से मिलीभगत करके 122 शिक्षकों का विनियमितीकरण किया, इसके बाद 34 शिक्षकों के विनियमतीकरण को गलत तरीके से रद्द किया ताकि उन्हें कोर्ट से राहत मिल जाए।
कहा गया कि शिकायतें मिलने पर प्रथम दृष्टया जांच में दोषी मिलने पर याची को निलंबित कर कार्यवाही की जा रही है। यह भी कहा गया कि याची ने ज्ञात स्त्रत्तेतों से अधिक सम्पत्ति भी कमा रखी है जिसकी ओपन विजिलेंस जांच चल रही है, ऐसे में याची को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र में भी माफिया घुसे हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, इनकी वजह से स्कूल व कॉलेज लाभ कमाने के संस्थान बनाकर रह गए हैं।

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