प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीति विरुद्ध प्रधानाध्यापकों का अंतरजनपदीय तबादला निरस्त करने के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
कहा है कि तबादला नीति में सामान्यतया कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करतीं, जब तक की मनमानी न हो। नीति के खंड पांच को अधिक स्पष्ट करने पर बल दिया। कोर्ट ने कहा तबादला नीति प्रशासनिक नीति है। कोई वैधानिक प्रावधान नहीं, जिसे कोर्ट से लागू कराया जाए। यह भी कहा कि किसी को मनपसंद जिले में तबादले का मूल अधिकार नहीं है।यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने श्रद्धा यादव व छह अन्य, मिथिलेश यादव, मीनाक्षी गुप्ता, विवेक श्रीवास्तव व छह अन्य की याचिकाओं पर दिया है। अपर मुख्य
सचिव ने दो जून 23 को 2023-24 की अंतरजनपदीय तबादला नीति जारी की। याचियों ने ऑनलाइन आवेदन किया और उनके तबादले कर दिए गए, लेकिन कार्यमुक्त नहीं किया गया तो याचिका दायर की।
बेसिक शिक्षा परिषद ने तबादला निरस्त कर दिया। कहा कि याची पदोन्नत होकर प्रधानाध्यापक हो चुके हैं। जिन जिलों में इनका तबादला किया गया है, इन्हीं के बैच के सहायक अध्यापक कार्यरत हैं।
यदि तबादला किया गया तो असहज स्थिति होगी। सहकर्मी के साथ असमंजसता की वजह से कार्य करने में प्रतिकूलता होगी। यह नहीं कह सकते कि तबादला निरस्त करना न्याय संगत नहीं है और तबादला निरस्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। संवाद

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