लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा मामले में हिमांशु राना और अन्य याचियों का कहना है कि वर्ष 2010 में टीईटी लागू होने के बाद ही नियुक्ति व प्रोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया था। इसके लागू होने से पूर्व नियुक्ति पाए अध्यापकों के लिए यह व्यवस्था दी गई थी कि वे अपने पदों पर कार्यरत रहेंगे परंतु प्रोन्नति पाने के लिए उन्हें भी टीईटी पास करना होगा।
एक सितंबर 2023 को अधिसूचना जारी करते हुए एनसीटीई ने पुनः इस बात को स्पष्ट किया है कि प्रोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य शर्त है, इसके बावजूद नियम 18 के तहत टीईटी न पास करने वाले अध्यापकों को प्रोन्नति दी जा रही है। कोर्ट के सामने मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर कहा गया कि उसने भी ऐसी प्रोन्नतियों के लिए टीईटी को अनिवार्य माना है। कोर्ट ने केंद्र तथा राज्य सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

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